जर्जर सरकारी स्कूल का वीडियो दिखाने पर दर्ज FIR को हाईकोर्ट में चुनौती, CJP सदस्य गौरव भारती ने मांगी सुरक्षा
फर्रुखाबाद के सरकारी प्राइमरी स्कूल का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने के मामले में याचिका; FIR रद्द करने और गिरफ्तारी से राहत की मांग।
प्रयागराज, 18 सितंबर । कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के सदस्य और छात्र ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की है। यह एफआईआर फर्रुखाबाद के सरकारी प्राइमरी स्कूल की हालत दिखाने वाला वीडियो रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर शेयर करने के आरोप में दर्ज की गई है। गौरव भारती उर्फ गौरव कुमार द्वारा दायर याचिका में 19 अगस्त को बीएनएस की धारा 352 और 353 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 के तहत दर्ज एफआईआर को चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ता ने गिरफ्तारी और उसके बाद होने वाली आपराधिक कार्यवाही से सुरक्षा की भी मांग की। उनका तर्क है कि अगर एफआईआर के आरोपों को सही भी मान लिया जाए तो भी इसमें उन अपराधों के ज़रूरी तत्व नहीं दिखते जिनके तहत मामला दर्ज किया गया। याची के वकीलों के अनुसार मामले की सुनवाई अगले सप्ताह होने की संभावना है। याचिका के अनुसार, विवाद 16 अगस्त, 2026 को शुरू हुआ, जब याचिकाकर्ता कथित तौर पर फर्रुखाबाद के करणपुर माजरा बसमल स्थित एक सरकारी प्राइमरी स्कूल के परिसर में गया और स्कूल की हालत का वीडियो रिकॉर्ड किया।
याचिका में कहा गया कि उस दिन स्कूल बंद था और वीडियो में "इस्तेमाल न होने वाली/जर्जर" इमारत दिखाई गई, जिसमें इस्तेमाल में बताई जा रही एक संरचना पर क्रॉस का निशान दिखाया गया। इसमें आगे कहा गया कि याचिकाकर्ता ने वीडियो में बताया कि स्कूल में पानी भर गया, जिससे बच्चों के बैठने की जगह नहीं बची और उन्हें छुट्टी देनी पड़ी। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह वीडियो एक सार्वजनिक शिक्षण संस्थान की हालत और बच्चों की भलाई व सुविधाओं से जुड़े मामलों को उजागर करने के लिए "अच्छी नीयत" से बनाया और पब्लिश किया गया। हालांकि, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई।
याचिका में यह भी कहा गया कि सोशल मीडिया पर याचिकाकर्ता की अच्छी-खासी मौजूदगी है। उनके इंस्टाग्राम पर लगभग 2.5 लाख और फेसबुक पर 1.5 लाख फॉलोअर्स हैं। एफआईआर में आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता एक अज्ञात व्यक्ति के साथ स्कूल गया, जो कथित तौर पर शराब के नशे में था और उसने शिक्षकों से "बेमतलब की बातें" की। इसके बाद 19 अगस्त को शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज की गई। हालांकि, याचिकाकर्ता का तर्क है कि एफआईआर में कथित तौर पर कहे गए असल शब्द नहीं लिखे गए, यह नहीं बताया गया कि ये शब्द किसके लिए कहे गए, और न ही यह समझाया गया है कि इनसे जान-बूझकर अपमान कैसे हुआ।
याचिका में एफआईआर और उससे जुड़ी सभी कार्यवाहियों को रद्द करने के साथ-साथ कार्यवाही के दौरान सुरक्षा की मांग की गई है।