सेवानिवृत्ति के 8 साल बाद पेंशन कटौती पर हाईकोर्ट की रोक, बुजुर्ग याचिकाकर्ता को राहत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अरुण कुमार शुक्ला की पेंशन पुनर्निर्धारण के आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई; बिना कटौती मूल PPO के अनुसार पेंशन जारी रखने का निर्देश।
प्रयागराज, 18 सितंबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक वरिष्ठ नागरिक की याचिका पर उनकी पेंशन में की गई कटौती पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने यह आदेश अरुण कुमार शुक्ला की याचिका पर पारित किया।
याचिकाकर्ता अरुण कुमार शुक्ला 31 दिसंबर 2017 को सेवानिवृत्त हुए थे और उनका अंतिम आहरित वेतन 1,19,300 रुपये था। इसी के अनुरूप उन्हें पेंशन दी जा रही थी। लेकिन लगभग आठ साल बाद, 6 नवंबर 2025 के आदेश द्वारा संबंधित प्राधिकारी ने कमेटी की सिफारिश पर उनकी पेंशन का पुनर्निर्धारण कर दिया, जिससे उन्हें नुकसान हुआ।
उच्च न्यायालय ने पाया कि 16 जनवरी 2007 के शासनादेश की धारा 7 स्पष्ट रूप से कहती है कि कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के 34 महीने बाद रिकॉर्ड में संशोधन नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के सुशील कुमार सिंघल बनाम प्रमुख सचिव सिंचाई विभाग (2014) मामले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि यह शासनादेश कर्मचारियों को 34 महीने की सीमा से आगे किसी भी हस्तक्षेप से सुरक्षा प्रदान करता है।
न्यायालय ने कहा कि मामला विचारणीय है और राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही अगले आदेश तक 6 नवंबर 2025 के आदेश को स्थगित रखते हुए यह निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को बिना किसी कटौती के मूल पेंशन भुगतान आदेश के अनुसार पेंशन दी
जाती रहे।