वाराणसी: मणिकर्णिका चक्रपुष्करिणी तीर्थ कुंड पर स्वच्छता के लिए अभियान
वाराणसी: मणिकर्णिका चक्रपुष्करिणी तीर्थ कुंड पर स्वच्छता के लिए अभियान
1वाराणसी, 03 मई । उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी काशी में मणिकर्णिका घाट स्थित मणिकर्णिका चक्रपुष्करिणी तीर्थ कुंड पर रविवार को नमामि गंगे के स्वयंसेवकों और वेद पाठी बटुकों ने लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। इस दौरान गंगा सेवक राजेश शुक्ल ने चक्रपुष्करिणी तीर्थ कुंड का महिमा गान कर कहा कि यहां स्नान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।
काशी खंड के अनुसार गंगा अवतरण से पहले इस कुंड का अस्तित्व है। भगवान विष्णु ने महादेव को प्रसन्न करने के लिए यहां हजारों वर्ष तपस्या की थी। भोलेनाथ और देवी पार्वती के स्नान के लिए उन्होंने कुंड को अपने सुदर्शन चक्र से स्थापित किया। कुंड में स्नान के दौरान मां पार्वती का कर्ण कुंडल कुंड में गिरने से नाम मणिकर्णिका पड़ा।
शुक्ल ने कहा कि इस कुंड में स्नान से अक्षय फल, चारों धाम के पुण्य का लाभ मिलता है। अक्षय तृतीया के दिन मणिकर्णिका घाट स्थित इस कुंड में स्नान-दान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है।
शास्त्रों के अनुसार शिव-पार्वती कुंड में नित्य स्नान करते हैं। मां मणिकर्णिका की अनुमति से शिवजी मृतकों को तारक मंत्र देकर मुक्ति दिलाते हैं। इसके जल का स्रोत गोमुख से जुड़ा होने की मान्यता है। एक और पौराणिक मान्यता है कि शिव-पार्वती स्नान कर प्रसन्न मुद्रा में झूम उठे। इतने में पार्वती के कर्ण कुंडल की मणि कुंड में गिर गई।