697 कार्डधारकों का राशन निकालने के लिए तीन आधार कार्ड का अवैध इस्तेमाल

-हाईकोर्ट ने सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान के लाइसेंस निरस्तीकरण पर राहत से किया इनकार

697 कार्डधारकों का राशन निकालने के लिए तीन आधार कार्ड का अवैध इस्तेमाल

प्रयागराज, 03 जनवरी । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक फेयर प्राइस शॉप लाइसेंस धारक को राहत देने से इनकार किया, जो 3 आधार कार्ड का इस्तेमाल करके 697 राशन कार्डधारकों का राशन अवैध रूप से निकाल रहा था। कोर्ट के समक्ष याची यह साबित नहीं कर पाया कि राशन असल में 697 राशन कार्डधारकों को बांटा जा रहा था।

याचिकाकर्ता शाहीन बेगम के फेयर प्राइस शॉप लाइसेंस रद्द करने के फैसले को बरकरार रखते हुए जस्टिस अरुण कुमार ने कहा, “यह साफ है कि 697 कार्डधारकों का राशन निकालने के लिए तीन आधार कार्ड के इस्तेमाल के बारे में याचिकाकर्ता ने कोई सही वजह नहीं बताई है। रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे यह पता चले कि याचिकाकर्ता द्वारा दायर किए गए 162 हलफनामे, जिसमें उनसे ज़रूरी सामान मिलने की बात स्वीकार की गई, वे 697 कार्डधारकों के हैं, जिनका राशन हेरफेर करके निकाला गया। भले ही 162 कार्डधारक नियमित रूप से राशन मिलने की बात स्वीकार करते हैं, लेकिन याचिकाकर्ता इस बात से बच नहीं सकता कि 697 कार्डधारकों के लिए तीन आधार कार्ड नंबर का इस्तेमाल उसकी अपनी मर्ज़ी से नहीं किया गया।”

जांच में पाया गया कि एक आधार कार्ड का इस्तेमाल कई कार्डधारकों का राशन निकालने के लिए किया जा रहा था। जिसके बाद याची और 21 अन्य लोगों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3/7 के तहत केस दर्ज की गई। याची का फेयर प्राइस शॉप लाइसेंस 697 कार्डधारकों के नाम पर ज़रूरी सामान की कालाबाजारी के आधार पर निरस्त कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने अपने फेयर प्राइस शॉप लाइसेंस रद्द करने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

कोर्ट ने पाया कि मशीन (इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ सेल) में हेरफेर करके याचिकाकर्ता ने 697 कार्डधारकों का राशन निकालने के लिए 3 आधार कार्ड का इस्तेमाल किया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता सर्वर में गड़बड़ी के आरोप का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। कोर्ट ने पाया कि अवधेश कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य के मामले में एक कोऑर्डिनेट बेंच ने बताया कि मशीन में दिन के दौरान कैसे हेरफेर किया जा सकता है, क्योंकि जब मशीन डायनामिक मोड में होती है और शाम को लॉक होने से पहले उसमें डिटेल्स डाली और एडिट की जा सकती हैं।

कोर्ट ने अवधेश कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य मामले पर भरोसा किया, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था, “केंद्र और राज्य सरकारों की पूरी कोशिश थी कि लाभार्थी के बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के साथ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल करके योग्य कार्ड होल्डर्स के लिए ज़रूरी चीज़ों की चोरी को कम किया जाए।” यह देखते हुए कि याची ने केवल 162 कार्ड होल्डर्स के एफिडेविट पेश किए जिन्हें असल में फ़ायदे मिल रहे थे, कोर्ट ने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं था जिससे यह साबित हो कि ये 162 कार्ड होल्डर्स उन 697 कार्ड होल्डर्स में से थे जिनके डेटा में हेरफेर किया गया। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।