हाईकोर्ट ने लड़की की उम्र 18 साल से अधिक पाते हुए रिहाई का दिया आदेश

--बाल कल्याण समिति के आदेश को गलत माना

हाईकोर्ट ने लड़की की उम्र 18 साल से अधिक पाते हुए रिहाई का दिया आदेश

प्रयागराज, 03 जनवरी । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शाहजहांपुर की बाल कल्याण समिति के आदेश को अवैध पाते हुए कार्पस को रिहा कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि याची की उम्र 18 साल से अधिक है, इसलिए वह स्वतंत्र है।

यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय तथा न्यायमूर्ति जफीर अहमद की खंडपीठ ने गुड्डी देवी व अन्य की हैबियस कार्पस याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा, चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी ने उम्र निर्धारण के लिए कोई उचित प्रक्रिया नहीं अपनाई। सिर्फ स्कूल रिकॉर्ड की फोटोकॉपी पर भरोसा किया, लेकिन मूल रिकॉर्ड नहीं देखा और न ही स्कूल के प्रधानाध्यापक से कोई सबूत लिया। यह भी नहीं देखा गया कि स्कूल रिकॉर्ड में जन्मतिथि कैसे और किसके कहने पर दर्ज की गई है।

याची ने मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए अपनी उम्र 19 साल से अधिक बताई थी जबकि स्कूल रिकॉर्ड में यह 18 साल से कम थी। याची ने पति के साथ रहने के लिए हेबियस कॉर्पस दायर की थी। कहा था कि वह अपने माता-पिता के घर से भागकर अपने पति के साथ रहना चाहती है। उसने अपनी मर्जी से आर्य समाज मंदिर बरेली में विवाह किया है, लेकिन पिता ने उसे नाबालिग बताते हुए एफआइआर दर्ज कराई है।

हाईकोर्ट ने पूर्व में निर्देश दिया था कि याचीगण गुड्डी तथा राजीव सिंह को गिरफ्तार नहीं किया जाए। कोर्ट ने कहा नौ जून 2025 का आदेश बिना सोचे-समझे और यांत्रिक रूप से पारित किया गया है। याची क्रमांक एक सरकारी बाल गृह (लड़कियों) सिंधी खेड़ा आश्रय गृह पारा, लखनऊ में रखी गई थी।