राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान एवं हिंदुत्व पुनर्प्रतिष्ठित करने का सबसे महत्वपूर्ण समय: जे नन्द कुमार

राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान एवं हिंदुत्व पुनर्प्रतिष्ठित करने का सबसे महत्वपूर्ण समय: जे नन्द कुमार

राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान एवं हिंदुत्व पुनर्प्रतिष्ठित करने का सबसे महत्वपूर्ण समय: जे नन्द कुमार

प्रयागराज, 31 जनवरी। वंदे मातरम का विभाजन रोक दिया गया होता तो भारत का भी विभाजन रुक जाता। वंदे मातरम भारत की स्वतंत्रता संग्राम को ऊर्जा देने वाला मंत्र था। हिंदुत्व से प्रेरणा लेकर इस गीत की रचना की गई। राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान के लिए हिंदुत्व को पुनर्प्रतिष्ठित करने का समय आ गया है। इसके लिए सभी को आगे आना होगा। यह विचार शनिवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सीनेट हाल में रज्जू भैया जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित बुद्धिजीवियों गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए विचार प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे नन्द कुमार ने कही।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद एक दौर ऐसा आया जब हिंदुत्व पर चारों ओर से वैचारिक आक्रमण सुनियोजित ढंग से शुरू किए गए। वैचारिक आक्रमण के उसी दौर में रज्जू भैया का उदय हुआ। केरल प्रवास में उनके साथ रहने का मुझे अवसर मिला। विज्ञान की उनकी दृष्टि से मैं बहुत प्रभावित हुआ। वह बहुत सरल शब्दों में अपना विषय रखते थे।

उन्होंने आगे कहा कि देश और विदेश के विश्वविद्यालयो में हिंदुत्व को तिरस्कृत करने वाले विषयों पर गोष्ठियां आयोजित की गयी। सनातन धर्म को डेंगू और मलेरिया कहा गया। बिना नाम लिए हुए उन्होंने कहा कि प्रयागराज से जुड़े एक नेता जो देश के प्रधानमंत्री भी हुए उन्होंने कहा कि मैं एक्सीडेंटली हिंदू हूं। हिंदू संस्कृति को हिंदुइज्म के विभ्रम में फंसाया गया।

जे नंद्र कुमार ने व्याकरण के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि जैसे नर से नरत्व और मनुष्य से मनुष्यत्व शब्द की निष्पत्ति होती है, इसी प्रकार हिंदू से हिंदुत्व शब्द ही निष्पन होगा। हिंदू शब्द के साथ अंग्रेजी का प्रत्यय नहीं जोड़ा जा सकता। हिंदू अपने आप में पूर्ण शब्द है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कोल्ड आइसक्रीम बोला जाए तो यह अशुद्ध प्रयोग होगा। ऐसे ही हिंदुइज्म गलत प्रयोग है। अंग्रेजी में इसे हिंदूनेस कहा जा सकता है। स्वामी विवेकानंद सही अर्थों में हिंदुत्व के प्रतिनिधि थे। शिकागो में उन्होंने अपने भाषण में कहा था की मैं भारत के करोड़ों लोगों के प्रतिनिधि के रूप में यहां खड़ा हूं। उन्होंने हिंदू संस्कृति के सर्व समावेशी स्वरूप को विश्व के सामने प्रतिष्ठित किया।

उन्होंने हिंदुइज्म शब्द को पूरी तरह से अशुद्ध प्रयोग बताया। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व पर आक्रमण करने वालों का स्वभाव समझना जरूरी है। ये भारत विरोधी लोग हैं। भारत को नष्ट करना चाहते हैं।

उन्होंने डंके की चोट पर कहा कि सभी राष्ट्रीय समस्याओं का समाधान हिंदुत्व से ही संभव है। चाहे वह पर्यावरण की समस्या हो टेक्नोलॉजी की समस्या हो या जेंडर प्रॉब्लम हो सब में हिंदू जीवन दृष्टि की आवश्यकता है। हिंदुत्व भारत की आत्मा है महर्षि अरविंद लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक आदि ने इसी हिंदुत्व को जागृत करने का प्रयास किया। हिंदुत्व के इस नवजागरण के कारण ही देश में वैचारिक परिवर्तन हुआ। 19वीं शताब्दी के प्रारम्भ से स्वतंत्रता संग्राम के पूर्व तक अनेक प्रसिद्ध लेखकों ने हिंदू सोशियोलॉजी हिंदू मैथमेटिक्स जैसे विषयों पर पुस्तक लिखी। वेद काल से प्रारम्भ होकर हिंदुत्व की यह धारा स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात कुछ समय के लिए रुक गई आज इसके प्रवाह को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

कार्यक्रम की अध्यक्ष इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव ने कहा कि रज्जू भैया इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मेधावी छात्र तथा योग्य शिक्षक थे।कठिन विषय को सरल शब्दों में समझाने की उनके पास कला थी। उनके पढ़ाये हुए छात्र विभिन्न प्रशासनिक पदों पर पहुंचे और न्यायाधीश तक हुए। कमला नेहरू अस्पताल के निर्माण में शिक्षकों के साथ चंदा कर उन्होंने धनराशि जमा की थी। यह विश्वविद्यालय पूर्व छात्र तथा आदर्श शिक्षक के रूप में रज्जू भैया को हमेशा याद रखेगा।

न्यास के अध्यक्ष वीरेंद्र पराक्रमादित्य ने रज्जू भैया के साथ बिताए गए समय का स्मरण करते हुए उनसे जुड़े अनेक प्रसंग सुनाए।

उन्होंने कहा कि वह कभी प्रथम श्रेणी के डिब्बे में यात्रा नहीं करते थे। तृतीय श्रेणी में बैठकर यात्रा करते थे और पूर्ण मनोयोग से अपने छात्रों को पढ़ाते थे। कार्यक्रम का संचालन आलोक मालवीय ने किया।

न्यास उपाध्यक्ष डा नीरज अग्रवाल ने मंचस्थ अतिथियों को परिचय कराया। न्यास सचिव महेश चतुर्वेदी ने न्यास कार्यो की जानकारी दी। भारत में विज्ञान की उज्ज्वल परम्परा विषय पर आयोजित प्रतियोगिता में जीआईसी प्रयागराज के आशुतोष कुमार, ज्वाला देवी सिविल लाइंस के शिवार्चित पाठक तथा जीजीआईसी फाफामऊ की कुमारी संघमित्रा को क्रमशः प्रथम द्वितीय तृतीय स्थान प्राप्त करने पर मंच पर पुरस्कृत किया गया। विद्या भारती क्षेत्र अध्यक्ष दिव्यकांत शुक्ला ने प्रतियोगिता के बारे में जानकारी दी। न्यास कोषाध्यक्ष राकेश सेंगर ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

व्याख्यान में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के प्रोफेसर रज्जू भैया विश्वविद्यालय राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, एमएनआईटी मेडिकल कॉलेज के प्राध्यापकों के अतिरिक्त विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्य शिक्षक आदि बड़ी संख्या में उपस्थित थे। संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल, सह प्रांत संघ चालक प्रोफेसर राणा कृष्ण पाल, पूर्व कुलपति प्रोफेसर राजाराम यादव, प्रांत प्रचारक रमेश, सह प्रांत प्रचारक सुनील ,प्रांत प्रचार प्रमुख मुरारजी त्रिपाठी, लोक सेवा आयोग सदस्य हरीश प्रताप सिंह जिला विद्यालय निरीक्षक पी एन सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।