संगम नगरी प्रयागराज में गूंजी सूफियत की आवाज: भारत के विकास में सूफी संतों के योगदान पर हुआ मंथन

संगम नगरी प्रयागराज में गूंजी सूफियत की आवाज: भारत के विकास में सूफी संतों के योगदान पर हुआ मंथन

संगम नगरी प्रयागराज में गूंजी सूफियत की आवाज: भारत के विकास में सूफी संतों के योगदान पर हुआ मंथन

प्रयागराज। संगम की पावन धरती और साहित्य-संस्कृति की केंद्र रही नगरी प्रयागराज के इलाहाबाद संग्रहालय का ऑडिटोरियम आज इतिहास, अध्यात्म और सद्भावना का गवाह बना। अवसर था सूफी अकादमी द्वारा आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन का मुख्य विषय "भारत के विकास में सूफी संतों का योगदान" रहा, जिसमें देश भर के जाने-माने विद्वानों ने हिस्सा लिया।

विद्वानों का जमावड़ा: समृद्ध हुई चर्चा

सम्मेलन में मुख्य अतिथि के तौर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के सीनियर प्रोफेसर अलीम अशरफ खान मौजूद रहे। वहीं, विशिष्ट अतिथि के रूप में जोधपुर यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति और वरिष्ठ प्रोफेसर अख्तरुल वासए ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनके अलावा लखनऊ विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के कई प्रोफेसरों और शोधकर्ताओं ने भी शिरकत की, जिससे इस सम्मेलन की गरिमा और बढ़ गई।

इतिहास के पन्नों में सूफी संतों का योगदान

सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की संस्कृति को निखारने में सूफी संतों का अतुलनीय योगदान रहा है। वक्ताओं ने कहा कि सूफी संतों ने न केवल प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया, बल्कि देश की गंगा-जमुनी तहजीब को सींचने, शिक्षा को बढ़ावा देने और समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने में भी अग्रणी भूमिका निभाई।

मौजूदा हालात पर जताई गई चिंता

सम्मेलन में जहाँ एक ओर इतिहास की गौरवशाली परंपरा पर चर्चा हुई, वहीं दूसरी ओर वर्तमान सामाजिक परिदृश्य और लोगों के बीच बढ़ती दूरियों को लेकर गहरी चिंता भी व्यक्त की गई। विद्वानों का मानना था कि सूफी संतों का मार्ग ही आज के समय में समाज को एकजुट रखने का सबसे सशक्त माध्यम है।

"भारत एक गुलदस्ते के समान है" – प्रोफेसर अलीम अशरफ खान

मीडिया से बात करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के सीनियर प्रोफेसर अलीम अशरफ खान ने बेहद भावुक और प्रेरक संदेश दिया। उन्होंने कहा:

"भारत एक खूबसूरत गुलदस्ते की तरह है, जहां हर फूल की अपनी अहमियत है। आज समाज में जिस तरह से नफरत का जहर घोला जा रहा है, उसे दूर करना हम सभी का परम कर्तव्य है। भले ही इस नफरत को मिटाने में थोड़ा समय लगे, लेकिन हम हर संभव कोशिश करेंगे कि दिलों की दूरियां खत्म हों।"

उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा कि, "हम पहले भी साथ थे और आगे भी एक साथ ही रहेंगे। विविधता में एकता ही भारत की असली खूबसूरती है और इसे अक्षुण्ण रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।"

सूफी अकादमी का यह प्रयास न केवल शैक्षिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण था, बल्कि सामाजिक सद्भाव के लिए भी एक मील का पत्थर साबित हुआ। प्रयागराज की धरती से उठी यह शांति और एकता की आवाज पूरे देश में भाईचारे का नया संचार करने का संकल्प दोहराती नजर आई।