इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इतिहासकारों की अनोखी शैली विश्व भर में अनोखी पहचान: प्रो. हेरंब चतुर्वेदी

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इतिहासकारों की अनोखी शैली विश्व भर में अनोखी पहचान: प्रो. हेरंब चतुर्वेदी

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इतिहासकारों की अनोखी शैली विश्व भर में अनोखी पहचान: प्रो. हेरंब चतुर्वेदी

प्रयागराज, 02 जून । इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग में मंगलवार को इतिहास विषय के शोधार्थियों के प्री-पीएचडी कोर्स वर्क का उद्घाटन किया गया।

कार्यक्रम में प्रसिद्ध इतिहासकार और विभाग के पूर्व आचार्य प्रोफेसर हेरंब चतुर्वेदी ने बतौर मुख्य अतिथि इतिहासकारों के शोध में विभिन्न प्रकरणों का उदाहरण देते हुए कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इतिहासकारों की अनोखी शैली “इलाहाबाद स्कूल ऑफ हिस्ट्री” की विश्व भर में अनोखी पहचान है।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में कोर्स के समन्वयक डॉ. पी.एस. हरीश ने कहा कि कोर्सवर्क में इतिहास के शोध विधि के अतिरिक्त कम्प्यूटर का उपयोग करना, साहित्य चोरी से बचने की जानकारी तथा ऑनलाइन संसाधनों के बारे में प्रशिक्षण दिया जायेगा।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि जी.बी. पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान की प्रो. अर्चना सिंह ने कहा अब इतिहास लेखन की विधि बहुविषयक हो गई है और इसलिए शोधार्थियों को अन्य विषयों की विधि की जानकारी भी होनी चाहिए।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के केंद्रीय लाइब्रेरी अध्यक्ष डॉ बी.के सिंह ने कहा कि ऑनलाइन संसाधनों से नए आयाम खुल रहे हैं परंतु साहित्य चोरी और आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के दुरुपयोग की चुनौती भी सामने आई। जिसके प्रति शोधार्थियों को सजग रहना है। ईश्वर शरण के आचार्य प्रो. डॉ. धीरज चौधरी ने कहा कि शोध विषय के चयन में समसामयिक समस्याओं को ध्यान में रखने की जरूरत है।

इविवि की पीआरओ प्रो. जया कपूर ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता विभाग के वर्तमान अध्यक्ष प्रो. आलोक प्रसाद ने एवं संचालन डॉ. संतोष कुमार ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. कुलदीप कुमार मिश्र ने दिया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ. आनंद प्रताप चंद, डॉ चंद्रभान यादव, डॉ. शिवशंकर श्रीवास्तव, डॉ. नीरज सिंह, डॉ. रफाक अहमद, डॉ. शिप्रा नंदन, डॉ. अंजुल, सुशील यादव, प्रांजल बरनवाल, अल्पना, यश, अनुभव, हीना, अंजली, सांभवी, कुन्दन आदि उपस्थित रहे।