परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी करने वाले जोड़े को पुलिस सुरक्षा देने का निर्देश

परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी करने वाले जोड़े को पुलिस सुरक्षा देने का निर्देश

परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी करने वाले जोड़े को पुलिस सुरक्षा देने का निर्देश

प्रयागराज, 24 जून । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पुलिस को परिवार के खिलाफ जाकर शादी करने वाले बालिगों की जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा किसी के वैवाहिक जीवन या शांतिपूर्ण साथ रहने में हस्तक्षेप किया जाता है, तो संबंधित पुलिस अधिकारी उन्हें तत्काल सुरक्षा प्रदान करें।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि दोनों बालिग हैं और 7 जून 2026 को विवाह कर चुके हैं। उनका आरोप था कि परिवार के सदस्य लगातार उन्हें परेशान कर रहे हैं और उनके वैवाहिक जीवन में दखल दे रहे हैं। इसी कारण उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए कोर्ट ने कहा कि बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने और विवाह करने का पूर्ण अधिकार है। न्यायालय ने माना कि सामाजिक नैतिकता के आधार पर किसी बालिग के व्यक्तिगत निर्णयों में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि दंपति के शांतिपूर्ण जीवन में कोई बाधा उत्पन्न होती है तो वे संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक या पुलिस अधीक्षक के समक्ष आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत कर सकते हैं, जिसके बाद उन्हें तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।

हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि इस आदेश को विवाह की वैधता अथवा विवाह प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता पर न्यायिक मुहर के रूप में नहीं माना जाएगा। साथ ही कहा गया कि यदि दंपती विवाह पंजीकरण के लिए आवेदन करते हैं और कोई कानूनी बाधा नहीं है, तो विवाह रजिस्ट्रार चार सप्ताह के भीतर पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करें और याचिका निस्तारित कर दी।