अवैध धर्मांतरण मामले में नया मोड़: मुख्य आरोपित छांगुर और नसरीन मेडिकल के बाद एटीएस कोर्ट में पेश, रिमांड बढ़ाने की मांग;

अवैध धर्मांतरण मामले में नया मोड़: मुख्य आरोपित छांगुर और नसरीन मेडिकल के बाद एटीएस कोर्ट में पेश, रिमांड बढ़ाने की मांग

अवैध धर्मांतरण मामले में नया मोड़: मुख्य आरोपित छांगुर और नसरीन मेडिकल के बाद एटीएस कोर्ट में पेश, रिमांड बढ़ाने की मांग;

लखनऊ, 16 जुलाई । उत्तर प्रदेश में चल रहे व्यापक अवैध धर्मांतरण नेटवर्क के एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, बलरामपुर जिले से गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपित जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा और उसकी कथित सहयोगी नीतू उर्फ नसरीन को आज लखनऊ स्थित एटीएस (एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड) विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। कल, बुधवार को, एटीएस ने दोनों का अनिवार्य मेडिकल परीक्षण कराया। इस दौरान, पत्रकारों से हुई बातचीत में छांगुर बाबा ने खुद को निर्दोष बताया।

यह गिरफ्तारी अवैध धर्मांतरण के उन मामलों की कड़ी में हुई है, जिनकी जांच उत्तर प्रदेश एटीएस पिछले कुछ समय से कर रही है। एटीएस टीम दोनों आरोपितों, जो इस धर्मांतरण गिरोह के अहम सदस्य बताए जा रहे हैं, को मेडिकल परीक्षण के लिए एक सरकारी स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंची थी। न्यायिक प्रक्रिया के तहत यह परीक्षण आवश्यक होता है ताकि आरोपितों के स्वास्थ्य की स्थिति सुनिश्चित की जा सके और भविष्य में कोई कानूनी विवाद न हो।

आज दोनों आरोपितों की वर्तमान रिमांड अवधि समाप्त हो रही है। सूत्रों के अनुसार, रिमांड के दौरान हुई गहन पूछताछ में एटीएस को इस अवैध धर्मांतरण रैकेट से जुड़ी कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील जानकारियां प्राप्त हुई हैं। इनमें धर्मांतरण के तौर-तरीके, इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों और संगठनों के नाम, तथा सबसे महत्वपूर्ण, विदेशी फंडिंग के स्रोत और उसके उपयोग से संबंधित अहम सुराग शामिल हैं। एटीएस अब अदालत में आरोपितों की न्यायिक हिरासत को आगे बढ़ाने की मांग करेगी, ताकि इन जानकारियों को और गहराई से खंगाला जा सके और नेटवर्क की अन्य कड़ियों तक पहुंचा जा सके।

इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री भी हो चुकी है, जो विशेष रूप से विदेशी फंडिंग के पहलू पर अपनी जांच केंद्रित करेगा। ईडी यह पता लगाएगी कि क्या इन वित्तीय लेनदेन में धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) या विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) का उल्लंघन हुआ है। विदेशी फंडिंग का एंगल इस मामले को न केवल धर्मांतरण, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक अपराधों से भी जोड़ता है, जिससे इसकी गंभीरता कई गुना बढ़ जाती है।

एटीएस कोर्ट में पेशी से ठीक पहले, दोनों आरोपितों का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विधिवत मेडिकल परीक्षण कराया गया, जो किसी भी न्यायिक प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, विशेषकर संवेदनशील प्रकृति के इस मामले को देखते हुए, सुरक्षा के बेहद पुख्ता और व्यापक इंतजाम किए गए थे ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। मेडिकल परीक्षण के दौरान वहां मौजूद मीडियाकर्मियों ने जब छांगुर बाबा से अवैध धर्मांतरण के आरोपों के बारे में पूछा, तो उसने एक बार फिर खुद को बेकसूर बताते हुए सभी आरोपों से इनकार किया। हालांकि, एटीएस का दावा है कि उनके पास आरोपितों के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं और आगे की पूछताछ से इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होगा।