भारतीय शिक्षा की अवधारणा, संस्कृति और परंपरा के बारे में सीख रहा हूं : प्रो. एमिली पुइग ई वलारो
भारतीय शिक्षा की अवधारणा, संस्कृति और परंपरा के बारे में सीख रहा हूं : प्रो. एमिली पुइग ई वलारो
वाराणसी, 05 फरवरी वाराणसी में अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई) में दो दिवसीय रिफ़ॉर्म्युलेटिंग पेडागॉजी फ़ॉर हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन्स (एच ई आईएस): क्रिटिकल, सस्टेनेबल, एंड ह्यूमन-सेंटर्ड टीचिंग-लर्निंग फ़्रेमवर्क्स अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला के समापन पर मुख्य अतिथि स्पेन के यूनिवर्सिटी ऑफ़ गिरोना के डिपार्टमेंट ऑफ़ पेडागॉजी के प्रोफेसर एमिली पुइग ई वलारो ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञानार्जन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को समझने और जीने की कला है। मैं स्वयं भी भारतीय शिक्षा की अवधारणा, संस्कृति और परंपरा के बारे में सीख रहा हूं।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आईयूसीटीई के विभागाध्यक्ष प्रो. आशीष श्रीवास्तव ने सभी प्रतिभागियों के प्रति हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने पेडागॉजी, एन्ड्रागॉजी, ह्यूटागॉजी, और पीरागॉजी के महत्व और आपसी संबंधों को सुस्पष्ट किया। कार्यक्रम का समन्वयन एवं धन्यवाद ज्ञापन सहायक आचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रमुख शिक्षाविद्, शोध छात्र, तथा केंद्र के अन्य समस्त संकाय सदस्य उपस्थित रहे।