फिटनेस सर्टिफिकेट के नवीनीकरण में पोर्टल की बाधा पर हाईकोर्ट सख्त
केंद्र सरकार को अंतिम अवसर, अधिकारियों को दी व्यक्तिगत पेशी की चेतावनी
प्रयागराज, 11 अप्रैल । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाहनों के फिटनेस प्रमाण पत्र के नवीनीकरण की प्रक्रिया में तकनीकी बाधाओं और न्यायालय आदेशों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि याचियों के वाहनों के फिटनेस नवीनीकरण में कोई बाधा आती है तो सम्बंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से तलब किया जा सकता है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा एवं न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने गुलाब सिंह व चार अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान याचियों की ओर से कोर्ट को बताया गया कि याचियों ने फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी से सम्पर्क किया था। आरटीओ ने यह कहते हुए हाथ खड़े कर दिए कि पोर्टल बंद है और पोर्टल को सक्रिय करने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। पोर्टल न खुलने के कारण मैनुअली भी काम नहीं हो पा रहा है।
कोर्ट ने गत 25 मार्च को निर्देश दिया था कि पोर्टल बंद होने की स्थिति में आरटीओ प्रयागराज को मैनुअली फिटनेस सर्टिफिकेट का नवीनीकरण कराने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद काम न होने पर कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें यह कहने पर मजबूर होना पड़ रहा है क्योंकि एक तरफ केंद्र सरकार की ओर से समय मांगा जा रहा है और दूसरी ओर अपनी चूक से कोर्ट के अंतरिम निर्देशों के अनुपालन में बाधा डाली जा रही है।
कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार के अधिवक्ता प्रांजल मेहरोत्रा को प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने के लिए छह मई तक का अंतिम समय दिया गया है। साथ ही अधिकारियों को चेतावनी दी कि किसी भी याची को फिटनेस नवीनीकरण में प्रतिरोध का सामना करना पड़ता है, तो वे शपथ पत्र दाखिल कर सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर जिम्मेदार अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होना होगा।