लखनऊ में फर्जी एनएसजी कमांडो गिरफ्तार: आलमबाग बस अड्डे पर मुफ्त यात्रा के प्रयास में पुलिस के हत्थे चढ़ा शातिर जालसाज
लखनऊ में फर्जी एनएसजी कमांडो गिरफ्तार: आलमबाग बस अड्डे पर मुफ्त यात्रा के प्रयास में पुलिस के हत्थे चढ़ा शातिर जालसाज
लखनऊ, 06 जुलाई (हिन्दुस्थान समाचार)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आलमबाग बस अड्डे पर एक बड़ा खुलासा हुआ है। आलमबाग थाना पुलिस ने शनिवार को एक ऐसे शातिर जालसाज को गिरफ्तार किया है, जो खुद को एनएसजी (राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड) कमांडो बताकर मुफ्त यात्रा करने और लोगों पर रौब जमाने का प्रयास कर रहा था। उसकी संदिग्ध गतिविधियों और बर्ताव के कारण लोगों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे धर दबोचा। पुलिस ने अपराधी को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
घटनाक्रम और गिरफ्तारी: आलमबाग थाना प्रभारी सुभाष चंद्रा ने रविवार को इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें बस अड्डे के कंडक्टरों द्वारा सूचना मिली थी। कंडक्टरों ने बताया कि एक युवक लगातार खुद को एनएसजी का कमांडो बताकर बसों में मुफ्त यात्रा करने के लिए उन पर दबाव बना रहा था। इस बात को लेकर उन लोगों की उस युवक से काफी तीखी बहस भी हुई थी। कंडक्टरों को उसकी बातों और हरकतों पर संदेह हुआ, जिसके बाद उन्होंने बिना देर किए पुलिस को सूचना देने का फैसला किया।
झूठी पहचान और गहन पूछताछ: सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और संदिग्ध युवक से पूछताछ की। शुरुआती पूछताछ में उस व्यक्ति ने खुद को एनएसजी कमांडो होने का दावा किया। उसने अपनी कहानी को विश्वसनीय बनाने के लिए बताया कि वह वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय महाराज को मिली वाई श्रेणी की सुरक्षा में तैनात एनएसजी कमांडो है। हालांकि, पुलिस की गहन और सख्ती से की गई पूछताछ के सामने उसकी झूठी कहानी ज्यादा देर टिक नहीं पाई। अंततः उसने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी और कबूल किया कि वह कोई एनएसजी कमांडाे नहीं है। उसने अपना वास्तविक नाम रंजन कुमार (22) बताया और कहा कि वह मूल रूप से कुशीनगर जिले के तरशा सुजानपुर का रहने वाला है।
बरामदगी और फर्जीवाड़े का तरीका: थाना प्रभारी ने बताया कि रंजन कुमार के पास से एक 'मेड इन इटली' की ऑटोमैटिक पिस्टल भी मिली है, जो उसके फर्जी कमांडो होने के दावे को पुख्ता करने में मदद करती थी। पूछताछ में यह भी सामने आया कि रंजन कुमार काफी समय से इसी तरह खुद को एनएसजी कमांडो बताकर बस और ट्रेनों में मुफ्त यात्रा करता था। इसके अलावा, वह अपनी फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर मूवी देखने और ढाबों व होटलों में मुफ्त खाना खाने के लिए भी लोगों पर रौब गांठता था। वह अपनी फर्जी पहचान के बल पर आम लोगों और कर्मचारियों को डराकर या प्रभावित कर अपना काम निकालता था।
पुलिस ने आरोपी रंजन कुमार को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जीवाड़े, सरकारी कर्मचारी का प्रतिरूपण करने और अवैध हथियार रखने सहित भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है। इस गिरफ्तारी से जहां एक ओर फर्जीवाड़े पर लगाम लगी है, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक परिवहन पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।