संतुलित पोषण से बढ़ेगी उपज और गुणवत्ता: डॉ सुबोध यादव

संतुलित पोषण से बढ़ेगी उपज और गुणवत्ता: डॉ सुबोध यादव

संतुलित पोषण से बढ़ेगी उपज और गुणवत्ता: डॉ सुबोध यादव

प्रयागराज, 07 जून । कृषि भूमि में संतुलित पोषण से उपज बढ़ेगी और गुणवत्ता में सुधार आएगा। संतुलित पोषण ही स्वस्थ फसल, बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ की कुंजी है। यह जानकारी रविवार को कृषि विज्ञान केंद्र प्रयागराज एवं सुआट्स संस्थान के कृषि वैज्ञानिक सुबोध यादव ने दी।

उन्होंने बताया कि किसान भाइयों काे ध्यान देना है कि खेत की मिट्टी में संतुलित पोषण ही स्वस्थ फसल, बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ की कुंजी है। मिट्टी की सेहत बनाए रखने तथा फसलों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग आवश्यक है।

कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुबोध यादव ने बताया कि नाइट्रोजन पौधों की पत्तियों और तनों की वृद्धि में सहायक होती है, जबकि फॉस्फोरस जड़ों के विकास तथा फूल, फल और बीज बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं पोटाश फसलों को रोग, कीट और सूखे जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों से बचाने के साथ दानों और फलों की गुणवत्ता में सुधार करता है।

कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि जिंक, सल्फर और आयरन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी अक्सर नजरअंदाज हो जाती है, लेकिन इनकी कमी से फसल की बढ़वार, उत्पादन और गुणवत्ता प्रभावित होती है। जिंक पौधों की वृद्धि में, सल्फर प्रोटीन निर्माण में तथा आयरन क्लोरोफिल निर्माण और प्रकाश संश्लेषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अत्यधिक नाइट्रोजन फसल के लिए खतरा

कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को चेतावनी देते हुए कहा कि अत्यधिक नाइट्रोजन का प्रयोग फसल के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। इससे पौधों में अत्यधिक बढ़वार होती है, फसल गिरने का खतरा बढ़ जाता है, रोग और कीटों का प्रकोप अधिक होता है तथा उत्पादन लागत बढ़ने से किसानों का लाभ कम हो जाता है।

मिट्टी की जांच के बाद ही उर्वरक का प्रयोग

किसान भाइयों से अपील है कि नियमित रूप से मिट्टी की जांच कराएं और उसकी रिपोर्ट के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करें। एनपीके उर्वरकों का संतुलित मात्रा में उपयोग करें तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को भी समय पर पूरा करें। साथ ही जैविक खाद और हरी खाद के प्रयोग को बढ़ावा दें तथा सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और समेकित कीट प्रबंधन अपनाएं।

कृषि विज्ञान केंद्र, प्रयागराज ने किसानों से अपील किया है कि वे संतुलित पोषण अपनाकर मिट्टी की सेहत सुधारें, उत्पादन लागत घटाएं और फसल की उपज एवं गुणवत्ता बढ़ाकर अधिक लाभ अर्जित करें। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ भविष्य की कृषि भी सुरक्षित रहेगी।