न्यायिक अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप पर सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक गोरखपुर तलब
न्यायिक अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप पर सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक गोरखपुर तलब
प्रयागराज, 08 अप्रैल। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बेसिक शिक्षा विभाग के सहायक शिक्षा निदेशक गोरखपुर की कार्यप्रणाली को गंभीरता से लेते हुए उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित पेश होने का निर्देश दिया है।
मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद खुद निर्णय लेने और स्थगन आदेश जारी करने पर कोर्ट ने इसे न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप माना है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने गुंजन मणि त्रिपाठी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
याचिका में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी देवरिया के गत 18 फरवरी के आदेश को चुनौती दी गई है। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि जिस आदेश को याचिका में चुनौती दी गई है, उसे सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक सातवां मंडल गोरखपुर ने 20 मार्च को अपने स्तर से ही स्थगित कर दिया है। अधिकारी ने अपने आदेश में यह भी लिखा कि यह रोक हाईकोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन रहेगी।
अधिकारी के इस कदम पर हैरानी जताते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि क्षेत्रीय स्तर पर कार्यरत बेसिक शिक्षा के उच्च अधिकारी ने स्वयं को न्यायिक प्राधिकारी मानते हुए उस आदेश पर रोक लगा दी, जो पहले से ही हाईकोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की ऐसी लापरवाह कार्यप्रणाली न केवल पीड़ितों को परेशान करती है और उन्हें बार-बार न्यायालय आने पर मजबूर करती है, बल्कि यह न्याय की प्रक्रिया में भी रोड़ा अटकाती है। कोर्ट ने सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक गोरखपुर को 27 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह स्पष्ट करने को कहा है कि जब मामला हाईकोर्ट के समक्ष विचाराधीन था, तो उन्होंने किस अधिकार के तहत आदेश पर सशर्त रोक लगाने का फैसला किया।