कृत्रिम बुद्धिमत्ता कोई विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता: अनुप्रिया पटेल

बीएचयू आईएमएस में नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

कृत्रिम बुद्धिमत्ता कोई विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता: अनुप्रिया पटेल

वाराणसी, 15 फरवरी । केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता कोई विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता “विकसित भारत 2047” की परिकल्पना और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज लक्ष्य के केंद्र में है।

उन्होंने कहा कि 146 करोड़ की जनसंख्या और लगभग 20 फीसद वैश्विक रोग-भार वहन करने वाले भारत के लिए एआई कोई विलासिता नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक तक सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुँचाने की ज़रूरत है।

केन्द्रीय मंत्री रविवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस-बीएचयू) के के. एन. उड़प्पा सभागार में आयोजित नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन हेल्थ केयर एंड एजुकेशन को सम्बोधित कर रही थी। उन्होंने कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन कर कहा कि एआई चिकित्सकों का स्थान लेने के लिए नहीं, बल्कि उनकी सहायता के लिए है और इसका उपयोग सुरक्षित, जिम्मेदार एवं नैतिक तरीके से किया जाना चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के नैतिक एवं जमीनी स्तर पर एकीकरण पर जोर दिया।

संगोष्ठी में बीएचयू कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि अब समय केवल चर्चा का नहीं, बल्कि आईएमएस-बीएचयू की स्वास्थ्य प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रत्यक्ष, उत्तरदायी और संरचित एकीकरण का है। उन्होंने एआई के सुरक्षित एवं नियामकीय मानकों के अनुरूप क्रियान्वयन के लिए एक समर्पित टास्क फोर्स के गठन का प्रस्ताव रखा। कुलपति ने कहा कि तकनीकी प्रगति के साथ तैयारी, प्रशिक्षण और सक्रिय सीखने की संस्कृति आवश्यक है।

संगोष्ठी में प्रदेश के आयुष मंत्री डॉ दयाशंकर मिश्र 'दयालु' ने कहा कि सर सुन्दर लाल चिकित्सालय अत्यधिक दबाव में कार्य करते हुए न केवल वाराणसी, बल्कि पूर्वांचल एवं पड़ोसी राज्यों के विशाल क्षेत्र को सेवाएँ प्रदान कर रहा है। वर्ष 1922 से चली आ रही इसकी ऐतिहासिक विरासत और प्रतिदिन हजारों मरीजों की निर्भरता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी उभरती तकनीकों को अपनाना दक्षता, रोगी प्रबंधन और सेवा गुणवत्ता सुधार के लिए आवश्यक है। उन्होंने चिकित्सकों से आग्रह किया कि तकनीकी प्रगति को अपनाते समय करुणा, धैर्य और मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि रखें। कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की निदेशक रीना आशीष विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रही।

सम्मेलन का शुभारम्भ चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक एवं आयोजन अध्यक्ष प्रो. एस. एन. संखवार के स्वागत भाषण से हुआ, जिसमें उन्होंने विषय की प्रासंगिकता और उत्तरदायी नवाचार की आवश्यकता पर बल दिया। उद्घाटन सत्र में सम्मेलन स्मारिका का भी विमोचन किया गया। संचालन डॉ. शशि प्रकाश मिश्रा एवं डॉ. साक्षी अग्रवाल ने किया। सम्मेलन के संयोजक एवं आरआरसी-ईस्ट टेलीमेडिसिन के समन्वयक अमित मिश्रा ने आयोजन की समग्र रूपरेखा और क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।