एसिड हमले की सजा के खिलाफ 41 साल बाद अपील खारिज

हाईकोर्ट ने कहा, सत्र अदालत के सात साल कैद की सजा सही

एसिड हमले की सजा के खिलाफ 41 साल बाद अपील खारिज

प्रयागराज, 20 अप्रैल । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आगरा के कटरा गडरियान में तीन लोगों पर एसिड फेंकने के आरोपित राजेंद्र को सत्र अदालत से सुनाई गई सात साल की कैद की सजा को सही माना और कहा कि दी गई सजा उचित है जिसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने कहा अभियोजन पक्ष संदेह से परे अपराध साबित करने में सफल रहा। तीनों चश्मदीद घायलों के बयान व अन्य साक्ष्य दोष साबित करने के लिए पर्याप्त है। कोर्ट ने सत्र अदालत आगरा के फैसले के खिलाफ दाखिल अपील खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी ने राजेंद्र की सजा के खिलाफ अपील की सुनवाई करते हुए दिया है।

सत्र अदालत ने घटना के एक साल के भीतर अपराध की सजा सुना दी थी और हाईकोर्ट में सजा के खिलाफ अपील का फैसला होने में 41 साल का समय बीत गया। मालूम हो कि सुभाष अशोक व दिनेश लाउडस्पीकर लगाकर आ रहे थे कि रास्ते में मारने की नीयत से आरोपित ने उन पर एसिड फेंका।

कोर्ट ने कहा कि इनमें से किसी घायल की मौत हो जाती तो निश्चित ही यह हत्या का अपराध होता। किंतु घायलों पर एसिड फेंक कर घायल करने का साक्ष्य है। घटना के चश्मदीद गवाह भी है। एक साइकिल व जला हुआ तहमद बरामद किया गया है। सत्र अदालत ने 20 अक्टूबर 85 को सजा सुनाई। दाे अक्टूबर 84 की घटना की एफआईआर तीन अक्टूबर 84 को दर्ज की गई। ट्रायल कोर्ट ने एक साल के भीतर सजा सुना दी और 1985 मे दाखिल अपील पर हाईकोर्ट का फैसला सजा के 41 साल बाद आया। जिसमें सुनाई गई सजा की पुष्टि की।