प्रतिष्ठा द्वादशी महोत्सव के मानस पाठ में भक्तिभाव से सभी झूमे रामभक्त
प्रतिष्ठा द्वादशी महोत्सव के मानस पाठ में भक्तिभाव से सभी झूमे रामभक्त
अयोध्या, 31 दिसंबर । श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा आयोजित द्वितीय प्रतिष्ठा द्वादशी महोत्सव के तीसरे दिन बुधवार को अयोध्याकाण्ड में सुंदर बालकों को देख कर उनके सौन्दर्य वर्णन व सीता के सकुचाने से नवाह्न के चौथे विश्राम के बाद पाठ शुरू हुआ| कार्यक्रम में मानस प्रेमी श्रोता भी गायक टीम के साथ रामचरितमानस का पाठ करते रहे |
श्री श्री मां आनंदमयी मानस परिवार कानपुर द्वारा " सीता राम चरण रति मोरे, अनुदिन बढ़उं अनुग्रह तोरे" संपुट के साथ व्यास कानपुर के योगेश भसीन ने श्री रामचरितमानस के दूसरे सोपान अयोध्याकाण्ड के चौथे नवाह्न विश्राम "कोटि मनोज लजावनि हारे| सुमुखि कहहु को अहहिं तुम्हारे||" के स्वर से पूरा पंडाल भक्ति रस से ओतप्रोत हो गया| इसी तरह पांचवें नवाह्न के अंतिम दोहा "राम सैल सोभा निरखि भरत ह्रदय अति पेमु| तापस तपफलु पाइ जिमि सुखी सिरानें नेमु||" तक सभी श्रोता औऱ वाचक मानस के रस में आकंठ डूबे रहे| पांचवें नवाह्न विश्राम के बाद चौपाई "तब केवट ऊँचे चढ़ि धाई| कहेउ भरत सन भुजा उठाई||" से दूसरे व्यास स्वामी विज्ञानानन्द ने मानस के तीसरे सोपान अरण्यकाण्ड में प्रवेश करते हुए नवाह्न के छठे विश्राम के दोहा "हारि परा खल बहु विधि भय अरु प्रीति देखाइ| तब असोक पादप तर राखिसि जतन कराइ" तक सस्वर पारायण कर सबको विभोर किया| संगीतमय श्री रामचरितमानस पाठ 23 सदस्यों द्वारा क्रमशः प्रस्तुत किया गया| कार्यक्रम सयोजक प्रेम प्रकाश मिश्र के अनुसार समन्वयक व्यास योगेश भसीन, कुमार गौरव शुक्ला, ऋषिकेश निवासी स्वामी विज्ञानानंद, मुरैना के राजेश ठाकुर की देख रेख में मानस पाठी शास्त्रीय एवं सामान्य स्वरों में पाठ करते रहे|| कार्यक्रम में सहयोग मुख्यरूप से सत्येंद्र श्रीवास्तव, अजय कुमार मिश्रा, धनंजय पाठक, रामशंकर उर्फ़ टिन्नू, अश्वनी अग्रवाल आदि ने किया|