अभी तो अपराजेय हैं योगी आदित्यनाथ? 2027 से पहले यूपी की सियासत पर बड़ा विश्लेषण
कानून-व्यवस्था, विकास योजनाएं, किसान हित और सामाजिक समीकरणों के बीच योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की चर्चा; 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के सामने होंगी कई राजनीतिक चुनौतियां।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का साथ पाकर उत्तर प्रदेश में तमाम मिथकों को गलत साबित करके लगातार दस साल मुख्य मंत्री रहने के बाद योगी आदित्यनाथ एक और कार्यकाल पाने के लिए भरपूर तैयारी कर ली है। अभी उनका विकल्प नहीं दिख रहा है। 2027 में होने वाले विधानसभा की घोषणा आने वाले दिनों में होने वाली है। 2022 के चुनाव से पहले दिल्ली में विपक्ष ने सुनियोजित किसान आंदोलन उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव को लक्ष्य करके चलाया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के किसानों के लिए किए गए काम ने पूरे प्रदेश में और खास करके आंदोलन वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों ने भाजपा का साथ देकर प्रदेश में लगातार दूसरी बार भाजपा की सरकार बनवा दी। इस बार भी विपक्ष पहले पेपर लीक के नाम पर और फिर एसआईआर (मतदाता सूची पुनरीक्षण) में गड़बड़ी के नाम पर आंदोलन चला रहा है। आंदोलन में जेन-जी यानी युवाओं के भरपूर संख्या में शामिल होने का दावा किया गया, लेकिन जब प्रधानमंत्री मोदी ने सीधे संवाद शुरू किए तो विपक्ष के सारे समीकरण फेल हो गए।
भाजपा ने ठोस रणनीति बनाकर इसका भी कारगर जवाब दिया है। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में भाजपा समर्थक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की लगातार इस साल भी जीत समेत पिछले दिनों अनेक स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा की जीत ने विपक्षी दावे को गलत साबित किया है।
मुख्यमंत्री योगी ने पिछले कार्यकाल में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को सुधारना सबसे प्रमुख लक्ष्य बनाया। इसमें वे पूरी तरह से कामयाब हो गए। 2017 के बाद त्योहारों के दौरान दंगे होने बंद हुए। उत्तर प्रदेश के घोषित माफिया या तो मारे गए या जेल भेजे गए। राजनीतिक संरक्षण प्राप्त अनेक माफिया हजारों एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा किए हुए थे। सालों से प्रदेश में उनकी एक तरह से समानांतर सरकार चल रही थी। उनके कब्जे से छुड़ाए गई सैकड़ों एकड़ जमीन पर सरकार ने बड़ी संख्या में गरीबों के लिए घर बनवाए। अब तक सरकार 62 लाख से अधिक गरीब परिवारों को आवास दे चूकी है। 93 लाख से अधिक लोगों को अटल पेंशन योजना का लाभ दिया जा चुका है। विभिन्न अपराधों में शामिल 34,254 से अधिक अपराधी और 289 घोषित अपराधी अब तक गिरफ्तार किए जा चुके हैं। अपराध रोकने के लिए इमरजेंसी रिस्पांस नंबर जारी करने के अलावा मिशन शक्ति शुरू किया गया। मिशन शक्ति के तहत समाज के हर वर्ग खास करके महिलाओं को अपराधियों से भयमुक्त बनाना का प्रयास किया गया। प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद से अपराधों में तेजी से गिरावट आई है।
योगी सरकार ने अपराध पर नियंत्रण करने के सात-साथ प्रदेश को विकास की दौड़ में अव्वल बनाने के प्रयास शुरू किए। इसके चलते जीडीपी में रिकार्ड 13.4 फीसदी बढ़ोतरी हुई। देश के खाद्यान उत्पादन में उत्तर प्रदेश की भागीदारी 21 फीसदी हो गई है। प्रदेश में सड़कों का जाल बिछा दिया गया है। प्रदेश सरकार ने हर मोर्चे पर ठोस काम किया है। हर जिले में एक मेडिकल कालेज और अस्पताल बनाया जा रहा है। 2017 तक चार हवाईअड्डे थे। अब बढ़कर 17 हो गए हैं और चार निर्माणाधीन हैं। हर जिले को एक विशिष्ट उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए-एक जिला एक उत्पाद योजना लागू किया गया है।1.86 महिलाओं के पीएम उज्ज्वला योजना में रसोई गैस कनेक्शन दिए गए हैं। 18.55 लखपति दीदी प्रदेश में बनाई गई हैं। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना का लाभ 26.81 लाख को मिला है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 5.20 लाख गरीब परिवार की बच्चियों को 51-51 हजार रुपये दिए गए। इस तरह की सैकड़ों कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रदेश के हर वर्ग और जाति के लोगों को बिना भेदभाव के लोगों को दिया जा रहा है।
सालों पहले किसान बिरादरी में भाजपा की पैठ कम थी। किसानों को बड़े पैमाने पर जोड़ने का काम पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने किया। उसे ठोस आधार योगी आदित्यनाथ ने दिया। पिछले चुनाव से पहले ही योगी जी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसान बिरादरी को स्थाई रूप से भाजपा के साथ जोड़ने में बड़ी कामयाबी पाई । इस इलाके की सबसे बड़ी नकदी फसल गन्ना के बकाये का करीब पौने दो लाख करोड़ रुपये समेत गन्ना किसानों का अब तक 3.15 लाख करोड़ रुपये का भुगतान करवाया। इतना ही नहीं गन्ने की कीमत 313 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल किया गया। भुगतान समय पर न करने पर जुर्माना लगाया जाने लगा है। प्रधानमंत्री मोदी की तरह ही मुख्यमंत्री योगी पर किसानों का विश्वास बढ़ने का नतीजा है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपने बल पर पूरी बहुमत की सरकार बना ली। यह तब हुआ जब दिल्ली की सीमाओं पर साल भर से ज्यादा चले किसान आंदोलन का अगुवाई पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के हाथों में ही थी। कुछ ही दिनों में साबित हो गया था कि किसान आंदोलन किसानों के मुद्दों से ज्यादा विपक्ष का राजनीति का औजार बनने लगा था। शायद इसी का अंदाजा होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों के हित बनाए गए तीनों कृषि कानूनों को 21 नवंबर, 2021 को बिना शर्त वापस लेने की घोषणा कर दी। इसके आधार पर संसद ने तीनों बिल को स्थगित कर दिया। बावजूद इसके किसी न किसी बहाने राजनीतिक कारणों से कुछ किसान नेता सरकार विरोधी अभियान फरवरी-मार्च,2022 में हुए विधानसभा चुनाव तक जारी रखे हुए थे। उन नेताओं और उनके को अपने प्रयास में कामयाबी नहीं मिली और भाजपा की सरकार पूरे बहुमत से फिर से बन गई।
भाजपा के दिवंगत नेता कल्याण सिंह ने सभी किसान बिरादरी को भाजपा से जोड़ने का जो प्रयास शुरू किया था, उसे मोदी और योगी ने सर्वव्यापी बना दिया। पहले जाट, गुर्जर, राजपूत,यादव, त्यागी और कुर्मी बिरादरी को ही मुख्य रूप से किसान कौम माना जाता था, जिनकी आबादी एक चौथाई से ज्यादा नहीं है। कल्याण सिंह ने इसमें लोध, राजपूत, काछी, कोइरी, सैनी आदि अनेक जातियों को सफलता से जोड़ने की प्रयास किया को यह आबादी 60 फीसद पार कर गई। इनमें से अनेक बिरादरियों के भाजपा का स्थाई साथ मिल रहा है। लोकसभा चुनाव में पिछली बार के 80 में से 72 के मुकाबले 2019 में 64 सीटें और विधानसभा में 2017 के 312 के मुकाबले 272 सीटें आने से पार्टी नेता सजग हो गए हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीटें घट कर 37 रह गई थी। संगठन में बदलाव करके कुर्मी बिरादरी के पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। वे मुख्यमंत्री के साथ तालमेल से पार्टी को लगातार तीसरी बार सत्ता में लाने की तैयारी में हैं। वैसे पिछले विधानसभा चुनाव में भी भाजपा की सीटें कम हुई और प्रदेश में सपा 47 से 125 पर पहुंच गई थी।
1980 के दशक में चले चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत के किसान आंदोलन को कृषि कानून के खिलाफ चले किसान आंदोलन ने दोबारा मजबूती दी। इसमें बड़ा योगदान विपक्षी नेताओं का रहा, जिन्होंने अपने राजनीतिक मकसद के लिए सरकार की समझौते की पेशकश को सफल नहीं होने दी। मोदी और योगी सरकार ने कभी भी किसान आंदोलन को ताकत से कुचलने का प्रयास नहीं किया। किसानों के हित में बनाए कृषि कानूनों को विरोध का मुद्दा बन जाने पर बिना संकोच के उसे वापस ले लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि हम इन कृषि कानूनों की अच्छाई सभी किसानों को समझाने में सफल नहीं हुए। इसका किसान बिरादरी पर सकारात्मक असर हुआ और महज कुछ ही महीने बाद हुए विधानसभा चुनाव में किसानों ने बड़ी संख्या में भाजपा का ही साथ दिया।
संयोग से देश की राजधानी दिल्ली के करीब बसे इस इलाके की समृद्धि का बड़ा कारण लोगों का हुनरमंद और मेहनती होना है। हर शहर और हर कस्बे में एक न एक विशिष्ट उद्योग कायम है। उसमें गांवों के लोग जुड़ते हैं और इलाके में सबसे बड़ी नकदी फसल गन्ना है। एक समय ऐसा था कि किसान मिल में गन्ना बेचने के बजाए अपने कोल्हू से गुड़, खांडसारी आदि बनाकर ज्यादा पैसा कमा लेते थे। हालात बदलने पर मिलों पर गन्ना किसानों की निर्भरता बढ़ती गई और फिर देर से भुगतान होने की समस्या बढ़ती गई। प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर मुख्यमंत्री ने बकाया भुगतान करवाने का संकल्प लिया। पहले पौने दो लाख करोड़ रुपये का भुगतान कराया गया। इसी के साथ-साथ गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाया गया। देरी से भुगतान पर जुर्माना लगाया गया। इसी का असर हुआ कि गन्ना उत्पादन का इलाका प्रदेश में बढ़कर 28 लाख हेक्टेयर हो गया। इसके बाद गन्ना भुगतान का मुद्दा नकारात्मक के बजाए सकारात्मक हो गया है। इतना ही नहीं प्रदेश सरकार ने हर घरेलू और लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए तरह-तरह की सहूलियतें उपलब्ध करवाई है। गांवों को चौड़ी सड़कों से जोड़कर हर समय बिजली उपलब्ध कराई जा चुकी है। हर गांव को आर्थिक विकास का एक मॉडल बनाने के अभियान में सरकार जुटी हुई। किसानों की आमदनी और बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। देश का सबसे बड़े राज्य होने के बावजूद विकास में देश में अव्वल बनाने का प्रयास जारी है।
मुख्यमंत्री ने पिछले सारे रिकार्ड तोड़ कर लगातार दस साल मुख्यमंत्री रहने का रिकार्ड बनाया। प्रदेश के राजनीतिक वातावरण के हिसाब से योगी आदित्यनाथ का विकल्प नहीं दिख रहा है। लगातार दस साल मुख्यमंत्री रहने के बावजूद उन पर भ्रष्टाचार का एक भी दाग नहीं लग पाया। इतना ही नहीं सभी को साथ लेकर चलने की क्षमता का लाभ यह हुआ कि पार्टी में गुटबाजी सार्वजनिक नहीं हो पाई। जिन नेताओं को सरकार से नाराज बताया जाता रहा वे भी मुख्यमंत्री से साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। केन्द्र की सरकार से तालमेल करके उत्तर प्रदेश में हर रोज विकास के नए काम किए जा रहे हैं। इन कामों में ज्यादातर वे काम हैं जिसका लाभ प्रदेश की जनता को लंबे समय तक मिलता रहेगा।