रावण के वंशज ने की थी पूजा, तब से बना त्रिसरा देव शिव मंदिर
रावण के वंशज ने की थी पूजा, तब से बना त्रिसरा देव शिव मंदिर
हमीरपुर, 10 अगस्त । उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के कुरारा क्षेत्र के मिश्रीपुर गांव से करीब एक किलोमीटर दूर सुनसान इलाके में स्थित प्राचीन त्रिसरा देव शिव मंदिर आस्था और पौराणिक मान्यताओं का अनूठा केंद्र है। सावन मास के दूसरे सोमवार को यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी है।
मंदिर के महंत गिरजा दास त्यागी ने बताया कि इस प्राचीन मंदिर का संबंध राजा बलि और रावण के समय की पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि प्राचीन काल में मूसानगर राजा बलि की राजधानी हुआ करती थी। राजा बलि ने सौ यज्ञ करने का संकल्प लिया था। 99 यज्ञ पूर्ण होने के बाद 100वें यज्ञ को संपन्न कराने के लिए उन्होंने महाज्ञानी रावण को आमंत्रित किया था। इसी दौरान रावण ने अपने वंशज त्रिसरा को यज्ञ संपन्न कराने के लिए भेजा।
कहा जाता है कि त्रिसरा ने मिश्रीपुर के समीप सुनसान स्थान पर रुककर भगवान शिव की आराधना की थी। रावण संहिता से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, रावण के वंशज जहां भी जाते थे, वहां शिवलिंग स्थापित कर पूजा-अर्चना करते थे। इसी स्थान पर शिव-पार्वती की अर्धनारीश्वर रूप में आराधना किए जाने की भी मान्यता है।
महिषासुर से भी जुड़ी है मान्यतामहंत ने बताया कि मंदिर से जुड़ी एक अन्य लोककथा के अनुसार, यहां माता की प्रतिमा प्रकट हुई थी। महिषासुर को प्रसन्न करने के लिए उसने अपना सिर काटकर स्थापित किया था। ऐसी मान्यता है कि महिषासुर के गले में पड़ी माला की गिनती पूरी नहीं हो सकी और इसी स्थान को राजा बलि के शासनकाल से जोड़कर देखा जाता है।मिश्रीपुर गांव के मजरा सिमरा में वामन भगवान का मंदिर भी बताया जाता है। वहीं राजा बलि के समय का बिलोट गांव आज भी अपनी प्राचीन पहचान समेटे हुए है। ग्रामीणों का कहना है कि राजा बलि के शासनकाल से जुड़े अवशेष आज भी क्षेत्र में मौजूद हैं।
सावन में लगता है श्रद्धालुओं का रेलात्रिसरा देव शिव मंदिर में सावन के प्रत्येक सोमवार श्रद्धालु पहुंचकर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करते हैं। ग्रामीणों के सहयोग से वर्ष में एक बार यहां यज्ञ एवं हवन का आयोजन भी किया जाता है। पुरातात्विक प्रमाणों से अलग, स्थानीय लोककथाओं और ग्रामीणों की आस्था में यह मंदिर राजा बलि, रावण के वंशज त्रिसरा और भगवान शिव की आराधना से जुड़ा एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है। सुनसान क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद सावन में यहां दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं और भगवान त्रिसरा देव के दर्शन कर मनोकामना मांगते हैं।---------------