बेटे ने 105 वर्षीय मां को कांवड़ में बैठाकर कराया गंगा दर्शन, 200 किमी पैदल चलकर पहुंचा संभल

कांवड़ के एक पलड़े में 28 लीटर गंगाजल और दूसरे में मां को बैठाकर हरिद्वार से संभल पहुंचे जोगिंदर, मातृभक्ति ने जीता लोगों का दिल

बेटे ने 105 वर्षीय मां को कांवड़ में बैठाकर कराया गंगा दर्शन, 200 किमी पैदल चलकर पहुंचा संभल

संभल , 09 अगस्त । उत्तर प्रदेश के जनपद संभल की बहजोई कोतवाली क्षेत्र के ग्राम खेतापुर में रहने वाला युवक हरिद्वार से कांवड़ में एक ओर गंगाजल और दूसरी ओर 105 वर्षीय मां को लेकर आया। सावन की कांवड़ यात्रा में लाखों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ की भक्ति में लीन है, लेकिन संभल के एक शिवभक्त ने अनोखी कांवड़ से आस्था को मातृ सेवा का ऐसा रूप दे दिया, जिसे देखकर हर कोई भावुक हो उठा।

बहजोई थाना क्षेत्र के गांव खेतापुर निवासी 52 वर्षीय अपनी 105 वर्षीय हरदेई को कांवड़ में बैठाकर गंगाजल लेकर लौटे। उनके कंधों पर एक ओर 28 लीटर गंगा जल था तो दूसरी ओर साक्षात मां। जहां -जहां यह कांवड़ पहुंची, लोक नमन करते नजर आए। जैसे ही जोगिंदर अपनी अनोखी कांवड़ के साथ संभल पहुंचे सड़क किनारे श्रद्धालुओं और राहगीरों की भीड़ जुट गई। किसी ने हाथ जोड़कर उनका अभिनंदन किया तो किसी ने इस अनूठे दृश्य को अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया।

पूरे रास्ते लोग उनकी मातृभक्ति और शिवभक्ति की प्रशंसा करते रहे। जोगिंदर ने बताया कि उनका सपना था कि वह अपनी मां को गंगा स्नान कराए इसलिए वह अपने बेटों के साथ हरिद्वार गए और वहां से कांवड़ के एक पलड़े में गंगाजल और दूसरे में अपनी 105 वर्षीय मां को बैठ कर पैदल ही संभल पहुंचे। हरिद्वार से संभल तक का सफर पैदल करने के बाद भी उनके चेहरे पर किसी भी तरह की कोई थकान नजर नहीं आई। वहीं जोगिंदर के पुत्र प्रमोद ने बताया कि उनका और उनके पिता का सपना था कि वह अपनी दादी को एक बार गंगा स्नान जरूर कराकर लाएं और उन्हें इस बार यह मौका मिल गया उन्होंने इसे अपने लिए बहुत ही बड़ा सौभाग्य बताया। वहीं इस विषय में 105 वर्षीय हरदेई ने बताया कि उन्हें अपने बेटे और पोते के इस कार्य पर बड़ी खुशी मिल रही है।