प्रयागराज में उदासीनाचार्य श्री चंद्र भगवान जी की 532वीं जयंती पर धार्मिक आयोजन, संत-महात्माओं ने की सहभागिता

-वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजन, संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने लिया भाग

प्रयागराज में उदासीनाचार्य श्री चंद्र भगवान जी की 532वीं जयंती पर धार्मिक आयोजन, संत-महात्माओं ने की सहभागिता

प्रयागराज, 20 सितंबर । श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन निर्वाण, कीडगंज में रविवार को उदासीनाचार्य जगद्गुरु श्री श्री चंद्र भगवान जी की 532वीं जयंती श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाई गई। श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन निर्वाण के श्री महंत दुर्गादास जी महाराज के नेतृत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इस अवसर पर अखाड़े के स्थानीय समिति के महंतों, महामंडलेश्वरों, संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

धार्मिक अनुष्ठान के दौरान वैदिक मंत्रों की गूंज से अखाड़ा परिसर आध्यात्मिक वातावरण से भर उठा। संत-महात्माओं ने उदासीनाचार्य श्री श्री चंद्र भगवान जी के चरणों में श्रद्धा अर्पित कर लोककल्याण, धर्म की रक्षा और मानव समाज के सुख-समृद्धि की कामना की। महंत दुर्गादास जी महाराज ने विधि-विधान से पूजन संपन्न कराया। जयंती समारोह में उदासीन संप्रदाय की आध्यात्मिक परंपरा और सनातन संस्कृति के संरक्षण का संकल्प भी दोहराया गया। संतों ने कहा कि उदासीनाचार्य श्री श्री चंद्र भगवान जी ने अध्यात्म, भक्ति, सेवा और मानव कल्याण का मार्ग दिखाया। उनकी शिक्षाएं आज भी समाज को धर्म, सदाचार और परोपकार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।

समारोह में उदासीन अखाड़ा के श्री महंत यमुनापरी महाराज,अटल अखाड़ा के भूधर गिरि महाराज, निर्वाणी अनि अखाड़ा के वैष्णव सम्प्रदाय श्री महन्त गोपाल दास महाराज, आनन्द अखाड़ा के स्वामी राजेश्वरानन्द महाराज, भारत सेवाश्रम के वीरानन्द महाराज, निरंजनी अखाड़ा के प्रतिनिधि महेन्द्र पुरी,अलोपी देवी मंदिर थाना पती मनसुख गिरी महाराज, नया उदासीन अखाड़े के मोहनदास महाराज,निर्मल पंचायती अखाड़ा के देवेन्द्र सिंह महाराज और श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन निर्माण के स्थानीय समिति के कोठारी व्यास मुनि जी महाराज, मुख्य सचिव हंस मुनि जी महाराज, कारवारी वंशी दास जी महाराज, कारवारी माधवानंद जी महाराज और कारवारी विश्वासानंद जी महाराज सहित अनेक संत-महात्मा मौजूद रहे। श्रद्धालुओं ने भी पूजन-अर्चन में शामिल होकर संत परंपरा का आशीर्वाद प्राप्त किया। अंत में सभी ने धर्म और समाज के कल्याण के लिए प्रार्थना की।