वाराणसी : सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षान्त महोत्सव में 51 छात्रों को मिलेगा स्वर्ण पदक
— 'विकसित भारत–2047' की संकल्पना पर आधारित होगी इस वर्ष की थीम
वाराणसी, 27 जुलाई । उत्तर प्रदेश में वाराणसी स्थित सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय का 44वाँ दीक्षान्त महोत्सव 29 जुलाई को प्रातः 9 बजे विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक मुख्य भवन में आयोजित होगा। इस अवसर पर वर्ष 2026 की परीक्षाओं में सफल 11,958 विद्यार्थियों को विभिन्न उपाधियाँ एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे, जबकि 29 मेधावी छात्र-छात्राओं को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए 51 स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया जाएगा। समारोह में प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल अध्यक्षता करेंगी तथा चार शिक्षकों को भी सम्मानित करेंगी।
यह जानकारी सोमवार को विश्वविद्यालय के योग साधना केन्द्र में आयोजित पत्रकार वार्ता में कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि समारोह के मुख्य अतिथि प्रख्यात वैज्ञानिक, शिक्षाविद् एवं पद्मश्री सम्मान से अलंकृत प्रो. आशुतोष शर्मा होंगे। विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय तथा उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी भी उपस्थित रहेंगी। समारोह में कुलपति विश्वविद्यालय की वार्षिक प्रगति एवं उपलब्धियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे, जबकि कुलसचिव राकेश कुमार औपचारिक कार्यवाही का संचालन करेंगे।
—235 वर्षों की गौरवशाली शैक्षिक विरासत
कुलपति ने बताया कि वर्ष 1791 में स्थापित संस्कृत महाविद्यालय से प्रारम्भ हुई इस संस्थान की यात्रा वर्ष 1958 में वाराणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय और वर्ष 1973 में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के रूप में विकसित हुई। लगभग 235 वर्षों की समृद्ध शैक्षिक परम्परा वाला यह विश्वविद्यालय आज उत्तर प्रदेश के साथ-साथ दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और उत्तराखंड सहित देश के अनेक राज्यों के विद्यार्थियों को संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परम्परा की उच्च शिक्षा प्रदान कर रहा है।
—11,958 विद्यार्थियों को मिलेंगी उपाधियाँ, 29 मेधावियों को 51 स्वर्ण पदक
प्रो. शर्मा ने बताया कि दीक्षान्त महोत्सव में प्रथम, पूर्व मध्यमा, उत्तर मध्यमा, शास्त्री, आचार्य, शिक्षाशास्त्री, संस्कृत प्रमाणपत्रीय, आयुर्वेदाचार्य तथा विद्यावारिधि सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों के 11,958 सफल विद्यार्थियों को उपाधियाँ एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे। विभिन्न परीक्षाओं में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले 29 मेधावी छात्र-छात्राओं को कुल 51 स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया जाएगा। इनमें 17 छात्रों को 35 तथा 12 छात्राओं को 16 स्वर्ण पदक प्रदान किए जाएंगे। सभी उपाधियाँ एवं प्रमाण-पत्र डीजी लॉकर के माध्यम से भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
—सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजेगा समारोह
दीक्षान्त महोत्सव में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर आधारित एक लघु वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा भारतीय सांस्कृतिक विरासत को रेखांकित करने वाले लोकगीत, लोकनृत्य और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जाएंगे, जो समारोह को और अधिक भव्य एवं यादगार बनाएंगे।
—'विकसित भारत–2047' को समर्पित है इस वर्ष की थीम
इस वर्ष के 44वें दीक्षान्त महोत्सव की थीम "संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परम्परा : विकसित भारत–2047 की वैचारिक आधारशिला" निर्धारित की गई है। कुलपति ने कहा कि यह विषय भारतीय ज्ञान-विज्ञान, सांस्कृतिक मूल्यों और संस्कृत की शाश्वत परम्परा को विकसित भारत के निर्माण की अवधारणा से जोड़ता है। विश्वविद्यालय का मानना है कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर, ज्ञान-आधारित, समृद्ध और विकसित भारत-2047 के निर्माण की सुदृढ़ आधारशिला है।