प्रयागराज के दारागंज में अनोखा कोलाज संग्रहालय, दुनिया की सबसे छोटी गीता-कुरान समेत दुर्लभ वस्तुएं
समाजसेवी दुकानजी ने सहेजा पुरानी वस्तुओं का अनूठा खजाना, संग्रहालय के विस्तार के लिए सरकार से मांगी जमीन
प्रयागराज, 11 अक्टूबर ।संगमनगरी के दारागंज में समाजसेवी राजेंद्र कुमार तिवारी ‘दुकानजी’ का अनूठा कोलाज संग्रहालय लोगों के आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। यहां दुनिया की सबसे छोटी भगवद्गीता, कुरान और शब्दकोश के साथ दुर्लभ एवं पुरानी वस्तुओं को सहेजकर रखा गया है। संग्रहालय में रखी सामग्री न केवल लोगों की जिज्ञासा बढ़ाती है, बल्कि आने वाली पीढ़ी को पुरानी वस्तुओं और उनसे जुड़ी यादों से परिचित कराने का माध्यम भी बन रही है।

राजेंद्र कुमार तिवारी उर्फ दुकानजी ने रविवार को बताया कि संग्रहालय में 1059 की वाटरप्रूफ साड़ी, 105 वर्ष पुराना नारियल, 60 वर्ष पुरानी लौकी, घड़ी, ट्रांजिस्टर, रेडियो, कैमरा, टेलीफोन, शंख, विभिन्न तीर्थस्थलों का जल, पुराने सिक्के और डाक टिकट सहित अनेक दुर्लभ वस्तुएं रखी गई हैं। इनमें से कई वस्तुएं लोगों ने भेंट की हैं। दुकानजी ने इन सभी को व्यवस्थित ढंग से सजाकर संग्रहालय का रूप दिया है, ताकि लोग इनके बारे में जान सकें और पुरानी चीजों के महत्व को समझ सकें।
पुरानी वस्तुओं को सहेजने की अनूठी पहल
दुकानजी का कहना है कि समय के साथ अनेक पुरानी वस्तुएं धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही हैं। इन्हें एक स्थान पर सुरक्षित रखना और लोगों को इनके बारे में जानकारी देना जरूरी है। इसी उद्देश्य से वह लोगों से पुरानी और दुर्लभ वस्तुएं एकत्र कर संग्रहालय में सहेज रहे हैं। उनका प्रयास है कि यह संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान और आकर्षण का केंद्र बने।
संग्रहालय के विस्तार के लिए भूमि आवंटन की मांग
दुकानजी ने प्रदेश सरकार, प्रयागराज के जिलाधिकारी, महापौर और नगर आयुक्त से संग्रहालय के विस्तार के लिए दारागंज में छोटी-सी भूमि आवंटित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि संग्रहालय को उपयुक्त स्थान मिल जाए तो इसे और व्यवस्थित तथा आकर्षक बनाया जा सकता है। वह चाहते हैं कि उनके पास रहने तक संग्रहालय का संचालन हो और बाद में इसे सरकार को सौंप दिया जाए, जिससे यह धरोहर लंबे समय तक सुरक्षित रह सके।
पर्यटन के मानचित्र पर मिल सकती है नई पहचान
दुकानजी का मानना है कि इस संग्रहालय को व्यापक पहचान मिलने से प्रयागराज आने वाले पर्यटकों को एक नया आकर्षण मिल सकता है। उन्होंने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से संग्रहालय का प्रचार-प्रसार करने की अपील की है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसके बारे में जान सकें। उन्होंने लोगों से भी आग्रह किया कि उनके पास यदि कोई पुरानी या दुर्लभ वस्तु है तो वे उसे संग्रहालय को भेंट कर इस पहल को आगे बढ़ाने में सहयोग करें।
दुकानजी की यह पहल पुरानी वस्तुओं को संरक्षित करने के साथ ही दारागंज को एक नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। यदि संग्रहालय के विस्तार और संरक्षण के लिए सहयोग मिलता है तो यह प्रयागराज की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विकसित हो सकता है।