आर्य कन्या डिग्री कॉलेज में गूंजा हिंदी का गौरव, पंकज जायसवाल बोले- देश की आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था को प्रभावित करती है हिन्दी

राजभाषा पखवाड़े के तहत काव्य-संगम में कवियों ने प्रेम, प्रकृति, देशभक्ति और सामाजिक सरोकारों पर सुनाईं रचनाएं; छात्राओं ने भी बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा

आर्य कन्या डिग्री कॉलेज में गूंजा हिंदी का गौरव, पंकज जायसवाल बोले- देश की आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था को प्रभावित करती है हिन्दी

प्रयागराज, 15 सितंबर । हिन्दी केवल संवाद का माध्यम ही नहीं, बल्कि देश की आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था को भी प्रभावित करने वाली भाषा है। हिन्दी हमारी मातृभाषा और राष्ट्रभाषा है।

यह बात आर्य कन्या डिग्री कॉलेज के शासी निकाय के अध्यक्ष पंकज जायसवाल ने कही। वह मंगलवार को कॉलेज के हिन्दी विभाग की ओर से राजभाषा पखवाड़े के तहत आयोजित काव्य-संगम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हिन्दी का व्यापक प्रयोग देश की एकता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है। हिन्दी को जन-जन तक पहुंचाने में साहित्यकारों और कवियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्राचार्या प्रो. अर्चना पाठक ने अतिथियों और कवियों का स्वागत करते हुए कहा कि कवि समाज के हर पक्ष पर अपनी दृष्टि रखते हैं। उनकी रचनाएं समाज को संवेदनशील बनाने के साथ ही विभिन्न विषयों पर सोचने के लिए प्रेरित करती हैं।

कार्यक्रम का विषय प्रवर्तन मुख्य प्रॉक्टर डॉ. रंजना त्रिपाठी ने किया। काव्य-पाठ के दौरान मिस्बाह इलाहाबादी, अखिलेश द्विवेदी, शरद मिश्रा, अशोक बेशरम, तरन्नुम नाज, प्रीता वाजपेई, आभा मधुर और शिल्पी सक्सेना ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवियों ने हिन्दी, प्रेम, प्रकृति, देशभक्ति और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर काव्य पाठ किया।

अशोक बेशरम ने सावन की कजरी और फागुन की तान में हिन्दी की महत्ता को स्वर दिया, जबकि शिल्पी सक्सेना ने अपनी रचना के माध्यम से देशप्रेम की भावना व्यक्त की। अन्य कवियों की रचनाओं में प्रेम, संवेदना और जीवन के विभिन्न रंग देखने को मिले। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आभा मधुर ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मुदिता तिवारी ने किया। इस अवसर पर लॉ डायरेक्टर डॉ. ममता गुप्ता, उप प्राचार्या प्रो. इभा सिरोठिया, डीन प्रो. अंजू श्रीवास्तव, डॉ. श्रुति आनंद, डॉ. शशि कुमारी, डॉ. अमित, डॉ. सुधा कुमारी, डॉ. दामिनी, डॉ. शिवानी सहित शिक्षक-शिक्षिकाएं, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।