मायावती ने आकाश आनंद को लेकर साफ किया रुख, बोलीं- अभी और परिपक्व होने की जरूरत; बड़ी जिम्मेदारी नहीं

लखनऊ में बसपा की बैठक में पार्टी प्रमुख ने कहा- आकाश आनंद को फिलहाल संगठन में काम करने की अनुमति है, लेकिन बड़ी जिम्मेदारी देने का फैसला अभी उचित नहीं; संगठन की मजबूती पर भी दिए निर्देश

मायावती ने आकाश आनंद को लेकर साफ किया रुख, बोलीं- अभी और परिपक्व होने की जरूरत; बड़ी जिम्मेदारी नहीं

लखनऊ, 03 सितंबर । बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा कि आकाश आनंद को अभी परिपक्व (मच्योर) होने की जरुरत है। तब तक इनकों पार्टी की अभी बड़ी जिम्मेवारी देना उचित नहीं होगा, जाे कि विरोधियों के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों को इस्तेमाल करके चुनाव में हानि पहुँचाने से बचने के लिये भी समय की ज़रूरत है।

बसपा प्रमुख मायावती ने गुरुवार को लखनऊ के माल एवेन्यू स्थित पार्टी के राज्य मुख्यालय में बैठक की। इस बैठक में उत्तर प्रदेश स्टेट, मण्डल यूनिट व सभी 75 जिलों के जिला अध्यक्षों सहित वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद थे। बैठक में उन्होंने कहा कि बसपा की आल-इण्डिया बैठक में पिछले दिये गये कार्यो की समीक्षा व उनकी कमियों को दूर करने तथा आगे के हर वर्ष के सालाना होने वाले कार्यों के बारे में भी पार्टी के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों को दिये गये ज़रूरी दिशा-निर्देशों का पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ अनुपालन करे।

उन्होंने कहा कि बसपा बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के आदर्श सिद्धान्तों व उच्च आदर्शों को लेकर चलने वाली पार्टी है। उनके ’आत्म-सम्मान व स्वाभिमान’ के कारवाँ को सत्ता की मंज़िल तक पहुंचाने के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए समर्पित पार्टी एवं मूवमेन्ट है, जिसको लेकर मान्यवर कांशीराम ने उच्च वैज्ञानिक पद की अपनी सरकारी नौकरी भी छोड़ दी थी। परिवार समेत सबकुछ त्याग करके अपना जीवन कड़ा संघर्ष करते रहे और मुझे भी ख़ासकर शोषितों को जागरुक करने के लिए देश के कोने-कोने में भेजकर इस योग्य बनाया। तांकि मैं, उन्हीं के नक्शेक़दम पर चलते हुये, उनके अधूरे रहे कारवाँ को आगे बढ़ाने की पूरी त्याग व तपस्या में लगी रहूँ। उन्होंने मुझे बसपा व बहुजन मूवमेन्ट का राजनीतिक उत्तराधिकारी भी बनाया। मैंने भी उनके जीते-जी ही काफी हद तक अच्छा रिज़ल्ट लाकर भी दिखाया है।

मायावती जी ने यह भी बताया कि बसपा के जन्मदाता एवं संस्थापक कांशीराम के संकल्प व समर्पण की तरह ही, मेरे लिये भी ’बहुजन समाज’ का हित, कल्याण व उसकी अस्मिता अर्थात् बसपा मूवमेन्ट द्वारा ’शोषित वर्ग को शासक वर्ग’ बनाने का मिशनरी लक्ष्य सर्वोपरि है। इस महान लक्ष्य की प्राप्ति के लिये निजी तौर पर मेरा ना तो कोई अपना है और ना ही पराया। जो भी बसपा व बहुजनों के हित के काम करेगा उसका स्वागत व आभार भी है।

मायावती ने कहा कि जिस प्रकार कांशीराम ने अपने परिवार के लोगों व अन्य रिश्तों-नातों आदि को पार्टी कार्य में सहयोग करने की छूट तो दे दी थी, किन्तु उन्हें चुनाव लड़ाने या सरकार बनने पर कोई भी पद आदि देने के वे खिलाफ थे, उसी प्रकार से उस संकल्प पर मैं भी पूरी तरह से क़ायम हूँ। इस पर अमल करते हुये मैंने आकाश आनन्द को पार्टी में कार्य करने की तो इनको इजाज़त दी है, जो हक़ीकत आप सभी लोगों के सामने है। लेकिन इस मामले में आकाश आनन्द को अभी और अधिक परिपक्व होने की जरुरत है। तब तक इनको पार्टी की अभी बड़ी ज़िम्मेवारी देना उचित नहीं होगा।

आल-इण्डिया की बैठक को सम्बोधित करने से मायावती ने सेन्ट्रल कैम्प कार्यालय में विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ पदाधिकारियों व अन्य ज़िम्मेदार लोगों से राज्यवार समीक्षा बैठक की और उनसे उनके राज्यों में पार्टी संगठन की मज़बूती एवं पार्टी के जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाने के बारे में पिछली आल-इण्डिया की हुई बैठक में दिये गये दिशा-निर्देशों की प्रगति रिपोर्ट ली और उल्लेखित कमियों को समयबद्ध तरीके़ से दूर करने की भी हिदायत दी। मायावती ने मान्यवर कांशीराम की अगले माह 9 अक्टूबर को पुण्यतिथि के अवसर पर यूपी में प्रदेश स्तर पर तथा बाकी राज्यों में ज़ोन-स्तर पर ’खुली संगोष्ठी के कार्यक्रम’ पूरी मिशनरी भावना से आयोजित किया जाए।

बसपा प्रमुख ने कहा कि इस समय दुनिया के कई भागों में जारी जंग तथा उसके फलस्वरूप तेज़ी से बदलते हुये हालात व सुरक्षा उपायों आदि में भी भारत की अपनी नीति—रणनीति मज़बूत होनी चाहिये। देश में आए दिन बढ़ रही महंगाई व कुदरती हो रही मार भी काफी चिन्ताजनक है। साथ ही वर्तमान में जेन-जी व जेन-अल्फा आदि की भी चल रही गम्भीर समस्याओं को दूर करना बहुत ज़रूरी है। राज्यों के साथ-साथ खासकर केन्द्र सरकार भी इन सब मामलों को ज़रूर गम्भीरता सेे ले, तो यह देश व जनहित में उचित होगा।