जैत गांव की तुलसी माला से महिला कारीगरों और ग्रामीण परिवारों को मिलेंगे नए अवसर : जयवीर सिंह
तुलसी माला से लड्डू गोपाल की पोशाक तक,जन्माष्टमी पर ब्रज के गांवों की ओर बढ़ा पर्यटकों का रुख
लखनऊ, 03 सितंबर । जन्माष्टमी पर जहां मथुरा-वृंदावन के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है, वहीं ब्रज की पर्यटन यात्रा अब मंदिरों और प्रमुख तीर्थस्थलों से आगे गांवों तक पहुंच रही है। मथुरा से कुछ दूरी पर स्थित जैत गांव ग्रामीण पर्यटन और पारंपरिक शिल्प के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। यहां पर्यटक तुलसी माला बनाने की कला देखने के साथ खुद माला तैयार कर सकते हैं। इसके अलावा लड्डू गोपाल की पोशाक बनाना, मिट्टी के बर्तन तैयार करना, ब्रज के व्यंजन, भजन, लोककथाएं और ग्रामीण परिवारों के साथ ठहरने का अनुभव भी लिया जा सकता है।
जैत गांव में तुलसी माला बनाने का काम पीढ़ियों से चला आ रहा है और गांव देश के बड़े तुलसी माला उत्पादन केंद्रों में शामिल है। इस शिल्प से 2,000 से अधिक परिवार जुड़े हुए हैं। अब इस पारंपरिक काम को पर्यटन से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की कोशिश की जा रही है। ‘गिरधारी तुलसी माला महिला समूह’ और ‘ब्रजरानी तुलसी माला महिला समूह’ के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी को संगठित किया गया है। यहां तैयार होने वाली मालाएं मथुरा-वृंदावन के अलावा दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, मुंबई और कोलकाता जैसे बाजारों तक पहुंच रही हैं।
जन्माष्टमी के दौरान तुलसी माला की मांग और बढ़ जाती है। श्रद्धालु इन मालाओं का इस्तेमाल जप के लिए करते हैं, गले में कंठी के रूप में पहनते हैं और इन्हें धार्मिक स्मृति के तौर पर भी खरीदते हैं। छोटी तुलसी मालाएं और आभूषण लड्डू गोपाल के श्रृंगार में भी इस्तेमाल होते हैं। हालांकि इस समय तुलसी का उत्पादन सीमित है, क्योंकि अगली खेती का चक्र दिसंबर में शुरू होना है। इसके बाद माला निर्माण और इससे जुड़ी आजीविका गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है। फिलहाल जन्माष्टमी के अवसर पर कार्यशालाओं और प्रदर्शनियों के माध्यम से पर्यटकों को इस शिल्प से जोड़ने और जैत गांव को तुलसी माला के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचान दिलाने पर जोर है।
जैत गांव के लिए यह अवसर ब्रज में बढ़ते पर्यटन के कारण और बड़ा हो गया है। वर्ष 2025 में मथुरा में करीब 10.24 करोड़ पर्यटक पहुंचे, जबकि 2022 में यह संख्या लगभग 6.53 करोड़ थी। वर्ष 2026 के शुरुआती तीन महीनों में ही करीब 1.90 करोड़ पर्यटक मथुरा पहुंचे। वर्ष 2025 की जन्माष्टमी पर अकेले मथुरा और वृंदावन में त्योहार वाले दिन शाम तक करीब 60 लाख श्रद्धालु पहुंच चुके थे।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने गुरुवार काे बताया कि, जैत गांव इस बात का उदाहरण है कि ब्रज की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से ग्रामीण आजीविका को कैसे जोड़ा जा सकता है। उन्होंने बताया कि तुलसी माला की कार्यशालाओं, ग्रामीण अनुभवों और होमस्टे से जोड़कर महिला कारीगरों, किसानों, स्थानीय गाइडों, मेजबानों और छोटे उद्यमों के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।
ब्रज क्षेत्र में करीब 3,000 कारीगरों को तुलसी माला और राधा-कृष्ण की पोशाक जैसे पारंपरिक रचनात्मक शिल्पों का प्रशिक्षण भी दिया गया है। साथ ही जैत गांव में शिल्प के साथ ग्रामीण आतिथ्य भी आकार ले रहा है। गांव में पांच होमस्टे विकल्प चिन्हित किए गए हैं। अरन्या कॉटेज फार्म स्टे और समालिया फार्म्स में ठहरने के साथ स्थानीय शाकाहारी भोजन और फार्म अनुभव उपलब्ध हैं, जबकि श्री होमस्टे, श्री हरि निवास होमस्टे और तेजवीर होमस्टे में घर का बना भोजन, ग्रामीण परिवारों से बातचीत और शिल्प कार्यशालाओं का अनुभव मिलता है। श्री होमस्टे संचालक केशव किशोर गौतम जापान, श्रीलंका, इटली समेत कई देशों से आए पर्यटकों की मेजबानी कर चुके हैं। वहीं जैत गांव निवासी संजय सिंह ने तुलसी मालाओं को बड़े बाजारों तक पहुंचाकर करीब 10 लाख रुपये की बिक्री की है। गांव में जय कुंड और कालिया नाग मंदिर जैसे धार्मिक स्थल भी हैं, जो ग्रामीण पर्यटन अनुभव को और समृद्ध करते हैं।