राजस्व विवाद में दर्ज FIR पर हाईकोर्ट की रोक, आरोपी प्रभात कुमार की गिरफ्तारी पर अंतरिम राहत

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राजस्व विवाद में दर्ज FIR पर हाईकोर्ट की रोक, आरोपी प्रभात कुमार की गिरफ्तारी पर अंतरिम राहत

प्रयागराज, 08 सितंबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को राजस्व विवाद के मामले में आपराधिक केस दर्ज होने के कारण आरोपी प्रभात कुमार की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने एफआईआर की वैधता की चुनौती याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि दर्ज एफआईआर वास्तव में यू.पी. राजस्व संहिता, 2006 की धारा 38(2) के तहत राजस्व न्यायालय द्वारा 19 जून 2026 को पारित एकपक्षीय निर्णय से उपजी है। याची ने बताया कि उसने इस आदेश के विरुद्ध सक्षम राजस्व न्यायालय में अपील दाखिल कर रखी है और उसे अपील में सफलता की पूरी उम्मीद है।

याची पक्ष का आरोप है कि यह एफआईआर बदनीयती से प्रेरित है और इसका इस्तेमाल सिविल अदालत में लंबित विवाद के न्यायिक निपटारे से बचने तथा याची को प्रथम सूचनाकर्ता की शर्तों पर समझौता करने के लिए दबाव बनाने हेतु किया जा रहा है।

याची के अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के सलीब उर्फ शालू उर्फ सलीम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले के फैसले का हवाला दिया, जिसमें शीर्ष अदालत ने कहा था कि जब कोई आरोपी सीआरपीसी की धारा 482 या संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत यह कहते हुए अदालत आता है कि कार्यवाही तुच्छ, तंग करने वाली या दुर्भावनापूर्ण मंशा से शुरू की गई है, तो अदालत का यह दायित्व बनता है कि वह एफआईआर की बारीकी से जांच करे। उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा था कि ऐसे मामलों में अदालत को केवल एफआईआर के कथनों तक सीमित न रहकर मामले से जुड़ी अन्य परिस्थितियों पर भी गौर करना चाहिए।

खंडपीठ ने कहा कि मामला विचार योग्य है। न्यायालय ने प्रतिवादी शिकायतकर्ता को नोटिस जारी करते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया।

न्यायालय ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक या पुलिस द्वारा सीआरपीसी की धारा 173/बीएनएसएस की धारा 193 के तहत पुलिस रिपोर्ट दाखिल किए जाने तक, जो भी पहले हो, याची की गिरफ्तारी पर रोक रहेगी।

यह एफआईआर 5 जुलाई 2026 को थाना लालापुर, जिला यमुनानगर, कमिश्नरेट प्रयागराज में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 336(3), 318(4), 61(2), 340(2) और 338 के तहत दर्ज की गई है।