प्रयागराज: केनरा बैंक में 1.25 करोड़ का गोल्ड लोन घोटाला, नकली सोना गिरवी रख जालसाजों ने लगाया चूना
नकली सोना गिरवी रखकर लिया सवा करोड़ का लोन
प्रयागराज: सिविल लाइंस स्थित केनरा बैंक की शाखा में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जालसाजों ने बैंक के ही स्वर्ण परीक्षकों (Gold Valuers) के साथ साठगांठ कर नकली सोने को असली बताकर 1.25 करोड़ रुपये का गोल्ड लोन ले लिया। इस भयंकर जालसाजी का भंडाफोड़ होने के बाद बैंक प्रबंधन में हड़कंप मच गया है। मामले में दो स्वर्ण परीक्षकों सहित कुल 16 नामजद और अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है।
खबर के मुख्य बिंदु:
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घोटाले की कुल रकम: ₹1,25,96,990 (लगभग सवा करोड़ रुपये)
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अपराध का तरीका: बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से नकली सोने पर गोल्ड लोन पास कराना।
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बैंक की शाखा: केनरा बैंक, सिविल लाइंस (प्रयागराज)
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आरोपी: 16 नामजद (जिसमें 2 बैंक के पैनल स्वर्ण परीक्षक शामिल) व अन्य अज्ञात।
कैसे हुआ इस बड़े घोटाले का खेल?
केनरा बैंक के क्षेत्रीय सह महाप्रबंधक पंकज वर्मा द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, बैंक में ग्राहकों को गोल्ड लोन देने से पहले पैनल में शामिल स्वर्ण परीक्षक सोने की शुद्धता की जांच करते हैं। आरोप है कि 13 जून 2023 से 5 मार्च 2025 के बीच भावापुर निवासी और बैंक के पैनल स्वर्ण परीक्षक विष्णु वर्मा ने गिरवी रखे गए सोने की जांच की। उसने नकली सोने को पास कर दिया और इसी फर्जी रिपोर्ट के आधार पर बैंक ने ग्राहकों को 1,25,96,990 रुपये का गोल्ड लोन बांट दिया।
हैरानी की बात यह है कि इस सोने की जांच संतकबीर नगर के खलीलाबाद निवासी बैंक के एक और स्वर्ण परीक्षक कौशल किशोर वर्मा से भी कराई गई थी, लेकिन उसने भी इस नकली सोने को सही ठहरा दिया।
ऐसे खुला फर्जीवाड़े का राज
इस बड़े घोटाले का खुलासा तब हुआ जब बैंक प्रबंधन ने अपने स्तर पर दोबारा जांच के निर्देश दिए:
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3 जुलाई 2025 को स्वर्ण परीक्षक सुधांशु वर्मा ने सोने की जांच की।
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15 जुलाई 2025 को दूसरे स्वर्ण परीक्षक शिव कुमार वर्मा ने भी जांच की।
इन दोनों की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हो गया कि बैंक की तिजोरी में गिरवी रखा गया सारा सोना नकली है।
इन 16 आरोपियों पर दर्ज हुई FIR
पुलिस के मुताबिक, बैंक की तहरीर पर निम्नलिखित लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है:
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मुख्य आरोपी (स्वर्ण परीक्षक): विष्णु वर्मा और कौशल कुमार वर्मा।
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प्रयागराज के निवासी: महेश प्रताप सिंह (टैगोर टाउन), श्रीश कुमार श्रीवास्तव (राजरूपपुर), विकास कुमार (झलवा), रंजना यादव (कीडगंज), फैज खान और आलोक केसरवानी (नैनी), कुलदीप कुमार दुबे (ग्यासुद्दीनपुर), कार्तिकेय कुमार कौशिक (राजापुर), मृत्युंजय सिंह (मीरापुर)।
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भदोही और ज्ञानपुर के निवासी: मनोज कुमार (रविदास नगर), रवि कुमार (ज्ञानपुर), मोहम्मद अरमान (कटरा बाजार), अजय कुमार (उपरवार), और पलटू (गोपीगंज)।
पुलिस की आगे की कार्रवाई
बैंक की ओर से शिकायतकर्ता ने पुलिस को सभी आरोपियों के पते मुहैया करा दिए हैं। सिविल लाइंस थाना प्रभारी रामाश्रय यादव ने बताया कि मामले में सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है।
पुलिस अब सभी आरोपियों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए थाने बुलाने की तैयारी में जुट गई है। थाना प्रभारी के मुताबिक, पूछताछ के बाद इस पूरे गिरोह से जुड़े कुछ अन्य लोगों के चेहरों से भी नकाब उठने की उम्मीद है और मामले में आगे कई और खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।