इलाहाबाद विश्वविद्यालय में स्वच्छता माह का समापन, प्रो. धनंजय यादव बोले- सफाई को बनाएं जीवन की स्थायी आदत
शिक्षा विभाग में आयोजित कार्यक्रम में बीएबीएड विद्यार्थियों और एनएसएस स्वयंसेवकों ने श्रमदान कर परिसर, पुस्तकालय और कक्षाओं की सफाई की। प्रतिभागियों ने स्वच्छता को दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।
प्रयागराज, 01 अक्टूबर । स्वच्छता को केवल विशेष अवसरों या अभियानों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे दैनिक जीवन की स्थायी आदत बनाना चाहिए। व्यक्तिगत जीवन, घर, शिक्षण संस्थान और आसपास के वातावरण में स्वच्छता के प्रति निरंतर जागरूकता जरूरी है।
यह बात गुरुवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं फैकल्टी रिक्रूटमेंट सेल के निदेशक प्रो. धनंजय यादव ने कही। वे शिक्षा विभाग में आयोजित स्वच्छता माह/स्वच्छता पखवाड़े के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि स्वच्छता को जीवन का पाठ बनाया जाना चाहिए। शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों की जिम्मेदारी है कि वे स्वयं स्वच्छता का पालन करें और समाज में भी इसके प्रति जागरूकता बढ़ाएं।
कार्यक्रम के दौरान बीएबीएड विद्यार्थियों और राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के स्वयंसेवकों ने शिक्षा विभाग के बाहर, पुस्तकालय परिसर और विभाग के कक्षों में स्वच्छता अभियान चलाया। विद्यार्थियों ने परिसर और कक्षाओं की सफाई करने के साथ कचरे को निर्धारित स्थान पर रखने और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने का संदेश दिया। अभियान में शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों और एनएसएस स्वयंसेवकों के साथ सक्रिय सहभागिता की।
इस अवसर पर डॉ. मनीष कुमार गौतम ने श्रम की गरिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति के कार्य और श्रम का सम्मान किया जाना चाहिए। स्वच्छता अभियान विद्यार्थियों को यह सीख देता है कि कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं स्वच्छता गतिविधियों में भाग लेने और समाज में श्रम के सम्मान तथा समानता की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया। डॉ. संगीता सिंह ने व्यक्तिगत स्वच्छता और स्वच्छ व्यवहार के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से व्यक्तिगत स्वच्छता, स्वच्छ परिवेश, उचित कचरा प्रबंधन और स्वस्थ जीवनशैली को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आग्रह किया।
स्वच्छता अभियान में विद्यार्थियों और एनएसएस स्वयंसेवकों की सक्रिय सहभागिता ने सामाजिक जिम्मेदारी, श्रम की गरिमा और सामुदायिक सहभागिता के प्रति जागरूकता को प्रदर्शित किया। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने स्वच्छता को दैनिक व्यवहार का अभिन्न हिस्सा बनाने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया।