हाईकोर्ट ने यूपी नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम 2021 के कई प्रावधानों को घोषित किया असंवैधानिक
हाईकोर्ट ने यूपी नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम 2021 के कई प्रावधानों को घोषित किया असंवैधानिक
प्रयागराज, 24 अगस्त । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम 2021 के कई अहम प्रावधानों को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। यह निर्णय न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह एवं न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने इंद्र भूषण साहनी व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया है।
कोर्ट ने माना कि यह कानून संविधान की समवर्ती सूची के अंतर्गत आता है और केंद्रीय कानून, सम्पत्ति अंतरण अधिनियम 1882 तथा प्रांतीय लघु वाद न्यायालय अधिनियम 1887 के प्रावधानों के विपरीत होने के बावजूद इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 254(2) के तहत राष्ट्रपति की पूर्व सहमति नहीं ली गई थी।
कोर्ट ने अधिनियम की धारा 8 (देय किराया), धारा 9 (किराया संशोधन), धारा 10 (विवाद की स्थिति में किराया प्राधिकरण द्वारा किराया निर्धारण), धारा 38 और धारा 42 (अधिनियम का अन्य कानूनों पर प्रभावी होना) को असंवैधानिक घोषित किया है। कोर्ट ने रेंट अथॉरिटी द्वारा धारा 10 के तहत किराया बढ़ाने और बेदखली से संबंधित आदेशों को रद्द कर दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि आदेश की तिथि तक जिन मामलों में कोई कानूनी चुनौती नहीं दी गई थी और जो प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं (जैसे निष्पादित एग्रीमेंट या निर्धारित किराया), वे सुरक्षित रहेंगी। हालांकि आगे के अधिकार पुराने कानून और केंद्रीय कानूनों के तहत तय होंगे। नए कानून के मुख्य प्रावधानों के रद्द होने के बाद पुराना कानून यानी उत्तर प्रदेश शहरी भवन (किराये पर देने, किराया तथा बेदखली का विनियमन) अधिनियम 1972 स्वतः प्रभाव में आ जाएगा।