पुरुषोत्तम मास प्रारम्भ होते ही मांगलिक कार्यों पर लगा विराम

- 15 जून तक विवाह, गृह प्रवेश व शुभ कार्य रहेंगे स्थगित, धार्मिक अनुष्ठानों का बढ़ा महत्व

पुरुषोत्तम मास प्रारम्भ होते ही मांगलिक कार्यों पर लगा विराम

मीरजापुर, 18 मई । सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखने वाले पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के प्रारम्भ होते ही जनपद में मांगलिक कार्यक्रमों पर विराम लग गया है। 17 मई से प्रारम्भ हुआ पुरुषोत्तम मास 15 जून तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन, तिलक तथा नए प्रतिष्ठानों के शुभारम्भ जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे।

पुरुषोत्तम मास लगने के साथ ही विवाह समारोहों से जुड़े कारोबार पर भी असर दिखाई देने लगा है। मैरिज लॉन, टेंट हाउस, कैटरिंग, बैंड-बाजा, डीजे, कपड़ा एवं आभूषण बाजार में रौनक कम हो गई है। कारोबारियों का कहना है कि अब 16 जून के बाद पुनः शुभ मुहूर्त प्रारम्भ होने पर बाजार में चहल-पहल लौटेगी।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ, जप-तप, कथा श्रवण, गीता पाठ, भजन-कीर्तन एवं दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। जनपद के मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारियां प्रारम्भ हो गई हैं।

आचार्य डा. रामलाल त्रिपाठी ने बताया कि हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित होता है, जबकि सौर वर्ष सूर्य की गति के अनुसार निर्धारित होता है। दोनों के बीच उत्पन्न समय अंतर को संतुलित करने के लिए लगभग प्रत्येक तीन वर्ष में एक अतिरिक्त माह जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास अथवा पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।

उन्होंने बताया कि इस माह में भगवान विष्णु की आराधना, व्रत, साधना एवं दान-पुण्य करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। पुरुषोत्तम मास के दौरान श्रद्धालुओं का रुझान धार्मिक गतिविधियों की ओर बढ़ जाता है। मां विंध्यवासिनी मंदिर सहित जनपद के प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना है। वहीं फूल, प्रसाद एवं पूजन सामग्री के व्यापार में भी तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।