कागजात की नकलें न मिलने पर अभियुक्तों ने हाईकोर्ट में लगाई गुहार
-अभियुक्तों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक, जवाब तलब
प्रयागराज, 11 जून । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मेरठ के परतापुर इलाके में प्रिया और उसकी पुत्री कशिश की हत्या का मुकदमा सेशन सुपुर्द करने से पहले अभियुक्तों को कागजात की नकलें न दिए जाने को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए अभियुक्त शमशाद व एक अन्य के खिलाफ अगले आदेश तक किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी ने शमशाद व उसकी पत्नी आयशा उर्फ सोनी की याचिका पर उनके अधिवक्ता और सरकारी वकील को सुनकर दिया है।मेरठ के परतापुर थानाक्षेत्र में प्रिया और उसकी पुत्री कशिश की हत्या पर आईपीसी की धारा 302, 201, 34 व 120-बी के तहत मामला दर्ज किया गया था।
याचिका में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के तीन सितम्बर 2021 और अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या एक के 19 जनवरी 2024 व गत 28 अप्रैल के आदेश को चुनौती दी गई है।
सुनवाई के दौरान याचियों के अधिवक्ता संदीप शुक्ला ने कोर्ट को बताया कि मुकदमा सेशन सुपुर्द करने से पहले याची अभियुक्तों को केवल चार्जशीट की नकल दी गई थी। अभियोजन के अन्य कागजात की नकलें नहीं दी गईं क्योंकि मजिस्ट्रेट कोर्ट तक याचियों का पक्ष रखने के लिए कोई अधिवक्ता नहीं था। जब अपर जिला व सत्र न्यायाधीश के समक्ष उक्त नकलों के लिए अर्जी दी गई तो उन्होंने यह कहते हुए अर्जी निरस्त कर दी कि इसके लिए मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रार्थना पत्र दिया जाना चाहिए था।
अधिवक्ता ने कहा कि सीजेएम व एडीजे अदालतों ने मामले के तथ्यों, सबूतों और परिस्थितियों पर गहराई से विचार किए बिना ही ये आदेश कर दिए हैं। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अगले आदेश तक याचियों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या बलपूर्वक कार्रवाई न की जाए। कोर्ट ने शिकायतकर्ता चंचल चौधरी को नोटिस जारी करने का निर्देश देते हुए उन्हें चार सप्ताह में याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा है।