उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने केन्याई संसदीय प्रतिनिधिमंडल से की मुलाकात
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने केन्याई संसदीय प्रतिनिधिमंडल से की मुलाकात
नई दिल्ली, 13 अगस्त । उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने गुरुवार को भारत की द्विपक्षीय यात्रा पर आए केन्या के नेशनल असेंबली के अध्यक्ष डॉ. मूसा एम. वेटांगुला के नेतृत्व वाले संसदीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच संसदीय संबंधों, डिजिटल प्रौद्योगिकी, क्षमता निर्माण और विकास साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा हुई।
उपराष्ट्रपति ने भारत और केन्या के बीच करीबी संसदीय संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत तकनीकी समाधान और डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपना अनुभव केन्या के साथ साझा करने के लिए तैयार है। उन्होंने पेपरलेस संसद की दिशा में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल में भारत के अनुभव की जानकारी भी दी। उन्होंने केन्या की नेशनल असेंबली परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित करने के प्रस्ताव की सराहना की।
राधाकृष्णन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2016 में केन्या की यात्रा की थी, जबकि राष्ट्रपति विलियम रूटो ने 2023 में भारत का दौरा किया था। उन्होंने दोनों देशों के बीच विकास साझेदारी का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत की अनुदान सहायता से नैरोबी विश्वविद्यालय की महात्मा गांधी ग्रेजुएट लाइब्रेरी का जीर्णोद्धार और केन्याई नौसेना के म्तोंग्वे बेस पर सीटी स्कैन संबंधी बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं पूरी की गई हैं।
उन्होंने इबोला वायरस के प्रकोप के दौरान भारत की सहायता का भी उल्लेख किया। भारत ने उस समय केन्या को 4.5 टन चिकित्सा सामग्री की पहली खेप उपलब्ध कराई थी।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत केन्या में क्षमता निर्माण के लिए करीब 400 छात्रवृत्तियां और विभिन्न सरकारी मंत्रालयों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम उपलब्ध करा रहा है। केन्या के 20 राजनयिक भारत में क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि दीर्घकालिक पाठ्यक्रमों के लिए आईसीसीआर छात्रवृत्तियां सालाना 80 से बढ़ाकर 100 कर दी गई हैं।
उन्होंने नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान केन्या में डिजी-लॉकर पायलट परियोजना के लिए हुए समझौते और केन्या में गति शक्ति परियोजना पर दोनों देशों की टीमों के सहयोग का भी उल्लेख किया।
राधाकृष्णन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2028-29 के लिए भारत की गैर-स्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी का समर्थन करने के लिए केन्या का आभार जताया और परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए भी समर्थन मांगा।
उन्होंने कहा कि भारत और स्वाहिली तट के बीच सदियों पुराने व्यापारिक संबंध रहे हैं। उन्होंने केन्या से अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस में शामिल होने की उम्मीद जताई। उन्होंने केन्या में भारतीय प्रवासी समुदाय को 44वीं जनजाति के रूप में मान्यता दिए जाने का भी स्वागत किया।
उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि केन्याई संसदीय प्रतिनिधिमंडल की यात्रा दोनों देशों के बीच संसदीय संवाद और व्यापक साझेदारी को और मजबूत करेगी।