आज़म खान और अब्दुल्ला आज़म के ड्यूल पैन कार्ड मामले से इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज ने खुद को किया अलग
आज़म खान और अब्दुल्ला आज़म के ड्यूल पैन कार्ड मामले से इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज ने खुद को किया अलग
प्रयागराज, 06 अगस्त
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने पूर्व सांसद एवं उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आज़म खान तथा पूर्व विधायक मोहम्मद अब्दुल्ला आज़म खान द्वारा दायर कथित ड्यूल पैन कार्ड मामले से संबंधित आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाओं (क्रिमिनल रिवीजन) की सुनवाई से स्वयं को अलग (रिक्यूज़) कर लिया।
दोनों पुनरीक्षण याचिकाएं 15 जुलाई 2026 को पारित आदेश के अनुपालन में गुरुवार, 6 अगस्त को टॉप-10 मामलों के रूप में सूचीबद्ध थीं। 15 जुलाई की सुनवाई में न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल एवं एन.आई. जाफरी तथा अधिवक्ता शाश्वत आनंद और अंकुर आज़ाद की ओर से आज़म खान एवं अब्दुल्ला आज़म खान का पक्ष सुना था। उस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अंतरिम जमानत प्रार्थना-पत्रों पर शीघ्र सुनवाई का अनुरोध करते हुए यह भी दलील दी थी कि दोनों पुनरीक्षणकर्ताओं को मामले में सम्मानपूर्वक बरी किया जाना चाहिए। इस आग्रह को स्वीकार करते हुए न्यायालय ने दोनों मामलों को 6 अगस्त 2026 को टॉप-10 मामलों के रूप में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था।
हालांकि, गुरुवार सुबह न्यायालय की कार्यवाही प्रारंभ होने पर आज़म खान और अब्दुल्ला आज़म खान की ओर से मामले को सुनवाई के लिए लेने का मौखिक उल्लेख (ओरल मेंशन) किया गया। इसी दौरान न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने स्वयं को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया तथा निर्देश दिया कि दोनों पुनरीक्षण याचिकाओं को नई पीठ के गठन के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
पिछले कुछ सप्ताहों से हाईकोर्ट इन पुनरीक्षण याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। इससे पूर्व न्यायालय दोनों मामलों में नोटिस जारी कर चुका था तथा पक्षकारों के बीच काउंटर एफिडेविट एवं प्रत्युत्तर हलफनामों के आदान-प्रदान के निर्देश भी दिए जा चुके थे। इसके अतिरिक्त, समान तथ्यात्मक एवं विधिक प्रश्नों को देखते हुए अब्दुल्ला आज़म खान की पुनरीक्षण याचिका को मोहम्मद आज़म खान की पूर्ववर्ती पुनरीक्षण याचिका के साथ टैग भी कर दिया गया था।
यतीमखाना मामलों में भी हो चुका है ऐसा
गौरतलब है कि आज़म खान परिवार से जुड़े मामलों में यह न्यायिक रिक्यूज़ल का दूसरा मामला है। इससे पहले 21 नवंबर 2025 को न्यायमूर्ति समीर जैन ने भी यतीमखाना प्रकरण से संबंधित मामलों के समूह की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था। उस दिन भी आज़म खान एवं अन्य सह-अभियुक्तों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति समीर जैन ने मामलों की सुनवाई से स्वयं को अलग करते हुए उन्हें नई पीठ के गठन के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
अब न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान के रिक्यूज़ल के बाद ड्यूल पैन कार्ड मामले से संबंधित दोनों आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाएं नई पीठ के गठन के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत की जाएंगी।
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