सो रहे बेटे का गला घोंटकर मारने वाली सौतेली मां को छह साल बाद मिली जमानत

--हाईकोर्ट ने कहा, बिना अनुमति सम्पत्ति का हस्तांतरण विक्रय या प्रभार नहीं कर सकेगी

सो रहे बेटे का गला घोंटकर मारने वाली सौतेली मां को छह साल बाद मिली जमानत

प्रयागराज, 18 नवम्बर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने घर में साथ सो रहे सौतेले बेटे को गला घोंटकर मारने की आरोपित सौतेली मां मिनता देवी की जमानत मंजूर कर ली है।

प्रकरण कौशाम्बी जनपद के पिपरी थाने में दर्ज है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ तथा न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा-प्रथम की खंडपीठ ने दिया है। अपीलार्थी छह फरवरी 2020 से जेल में बंद है। कोर्ट ने कुछ शर्तें भी लगाई हैं। कहा है कि वह इस अदालत की अनुमति बिना कोई स्थाई सम्पत्ति का हस्तांतरण, विक्रय या उस पर प्रभार नहीं कर सकेगी।

अभियोजन कथानक के अनुसार अपीलार्थी ने अपने सौतेले बेटे की गला घोंटकर उस समय हत्या कर दी थी जब वह अपने पति और तीन बच्चों के साथ कमरे में सो रही थी। दलील दी कि घटना उस कमरे में हुई जहां पति-पत्नी अपने तीन बच्चों के साथ सो रहे थे। यह सिर्फ अनुमान है कि सौतेली मां होने के नाते, उसने कथित अपराध किया है। उसके पति पर यह साबित करने का भार था कि अपराध न तो उसने किया और न ही अपीलार्थी ने। कमरे के अंदर क्या हुआ, यह मिनता के पति को ही सबसे अच्छी तरह पता है, लेकिन उसका नाम इस मामले में नहीं है। यह सिर्फ समाज की सामान्य धारणा के आधार पर है। कोई भी चश्मदीद बच्चे की गवाही निचली अदालत में नहीं ली गई। अपीलार्थी का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

सरकार ने जमानत का पुरजोर विरोध किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि इस न्यायालय में प्रतिदिन सौ से अधिक आपराधिक अपीलें सूचीबद्ध होती हैं और सभी पर गुण-दोष के आधार पर निर्णय देना मानवीय रूप से संभव नहीं है। अपील पर निकट भविष्य में सुनवाई की संभावना बहुत कम है, इसलिए जमानत अर्जी स्वीकार की जाती है। जेल से रिहाई की तारीख से एक महीने की अवधि के भीतर जुर्माने की 50 प्रतिशत राशि जमा करने का निर्देश भी कोर्ट ने दिया है। शेष राशि की वसूली रोक दी है। साथ ही सजा भी निलम्बित कर दिया है। अपील को सुनवाई के लिए नियमानुसार सूचीबद्ध करने का भी आदेश दिया।