शादी का झूठा वादा कर शारीरिक सम्बंध बनाने के आरोपित के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इंकार

शादी का झूठा वादा कर शारीरिक सम्बंध बनाने के आरोपित के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इंकार

शादी का झूठा वादा कर शारीरिक सम्बंध बनाने के आरोपित के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इंकार

प्रयागराज, 23 फ़रवरी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शादी का झूठा वादा कर एक महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाने के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही और चार्जशीट को रद्द करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि आरोपित पहले से ही शादीशुदा है, तो शादी का वादा शुरुआत से ही कपटपूर्ण माना जाएगा।

इसी के साथ न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना ने आरोपित विपिन कुमार और तीन अन्य की भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 528 के तहत दायर याचिका को खारिज कर दिया। यह मामला सहारनपुर के देवबंद स्थित अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में लंबित है।

पीड़िता ने 22 मई 2025 को विपिन कुमार, उसकी पत्नी, बहन और जीजा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। पीड़िता का आरोप था कि 2018 में फेसबुक के माध्यम से वह विपिन के संपर्क में आई थी, जिसने शादी का झांसा देकर उसके साथ लगातार यौन संबंध बनाए। एफआईआर के अनुसार पीड़िता पांच बार गर्भवती हुई, जिनमें से चार बार उसे गर्भपात के लिए मजबूर किया गया। बयान दर्ज कराते समय वह छह महीने की गर्भवती थी और बाद में उसने एक बच्ची को जन्म दिया। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो बनाए थे जिनका इस्तेमाल वह उसे ब्लैकमेल करने के लिए करता था। अन्य आरोपियों पर पीड़िता के परिवार को डराने-धमकाने और समझौते के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया गया।

याचियों के वकील ने तर्क दिया कि यह संबंध आपसी सहमति से बना था और इसमें किसी कपटपूर्ण तरीके का इस्तेमाल नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि पीडिता शिक्षित है और उसे पता था कि आरोपित शादीशुदा है क्योंकि वह 2016 में उसकी शादी में शामिल हुई थी।

दूसरी ओर सरकारी वकील और पीड़िता के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोपी शादीशुदा होने के बावजूद शादी का वादा कर रहा था, जो शुरू से ही धोखा था। उन्होंने बताया कि आरोपी ने पीड़िता को ब्लैकमेल करने के लिए गुप्त रूप से वीडियो बनाए थे। उन्होंने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114ए के तहत सहमति की अनुपस्थिति के अनुमान पर भी जोर दिया।

कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता 2023 की नई धारा 69 पर गौर किया, जो विशेष रूप से कपटपूर्ण साधनों या शादी के झूठे वादे द्वारा बनाए गए यौन संबंधों को दंडित करती है। कोर्ट ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 दंडात्मक कानून में एक नया प्रावधान है, जिसमें कपटपूर्ण साधनों या शादी के झूठे वादे के माध्यम से किसी महिला के साथ यौन संबंध बनाना बलात्कार' नहीं है बल्कि इसे अलग से दंडनीय बनाया गया है।

कोर्ट ने याचियों की ओर से पेश किए गए उदाहरणों को अलग बताते हुए कहा कि वर्तमान मामले में यह ट्रायल का विषय है कि पीड़िता को आरोपित की शादी की जानकारी पहले से थी या नहीं। इसके अलावा आरोपित को यौन संबंध बनाते समय पता था कि वह शादीशुदा है और उसका शादी का वादा झूठा है, इसलिए यौन संबंध बनाने की शुरुआत से ही धोखाधड़ी का आरोप स्पष्ट है।

कोर्ट ने आगे कहा कि धारा 528 के तहत निहित शक्तियों का प्रयोग अत्यंत दुर्लभ मामलों में ही किया जाना चाहिए। कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री मौजूद है जिसके आधार पर ट्रायल को जारी रखा जाना चाहिए। इसी के साथ कोर्ट ने याचिका को मेरिट के अभाव में खारिज कर दिया।