दो शिक्षकों के खिलाफ एक ही शिकायत पर एक को माफी और दूसरे को दंड
--बीएसए इटावा को कोर्ट ने किया तलब
प्रयागराज, 12 सितम्बर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दो शिक्षकों के खिलाफ एक ही गलती की शिकायत पर एक को निलम्बित करने और दूसरे को माफ करने के बीएसए इटावा के निर्णय पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि बीएसए का रवैया उनकी निष्पक्षता पर गम्भीर सवाल खड़ा करता है। यह प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग है। साथ ही अगली सुनवाई पर बीएसए इटावा को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने इटावा के प्रबल प्रताप सिंह की याचिका पर उसके अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी को सुनकर दिया है।
याची के अधिवक्ता का कहना था कि याची और ज्योति राव के खिलाफ सहयोगियों से दुर्व्यवहार करने की शिकायत की गई थी, जिस पर बीएसए ने याची को निलम्बित कर दिया। उसके खिलाफ जांच शुरू करते हुए आरोप पत्र दे दिया गया। जबकि ज्योति राव के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। बीएसए का यह आदेश भेदभावपूर्ण है क्योंकि याची ने जो स्पष्टीकरण दिया उसे बीएसए ने स्वीकार नहीं किया। जबकि उसी मामले में ज्योति राव का स्पष्टीकरण स्वीकार कर लिया गया और उसके खिलाफ समस्त कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड देखने से पता चलता है कि दोनों अध्यापकों ने स्पष्टीकरण दिया था, लेकिन बिना कोई कारण बताए मनमाने तरीके से याची के स्पष्टीकरण को असंतोषजनक करार दे दिया गया, जबकि दूसरे अध्यापक का स्पष्टीकरण स्वीकार कर लिया गया और उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई। यह गम्भीर चिंता और स्पष्ट भेदभाव का मामला है।
कोर्ट ने कहा कि दोनों के खिलाफ शिकायत होने के बावजूद सिर्फ एक के खिलाफ कार्रवाई की गई जबकि दूसरे के खिलाफ न तो कोई जांच हुई, न कोई कार्रवाई की गई। यह रवैया अधिकारियों की निष्पक्षता पर गम्भीर सवाल खड़ा करता है। कोर्ट ने कहा कि पहले भी ऐसे मामले आए हैं, जहां बीएसए ने किसी एक पर तो कार्रवाई की लेकिन उसी मामले में दूसरे पर कार्रवाई नहीं की। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की भेदभावपूर्ण कार्रवाई जांच प्रक्रिया की शुचिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करती है। इससे प्रशासनिक शक्ति के दुरुपयोग का पता चलता है। कोर्ट ने बीएसए इटावा को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का निर्देश दिया है।