वैध पत्नी नहीं फिर भी परिवार अदालत ने दिया गुजारा भत्ते का आदेश हाईकोर्ट ने लगाई रोक
वैध पत्नी नहीं फिर भी परिवार अदालत ने दिया गुजारा भत्ते का आदेश हाईकोर्ट ने लगाई रोक
प्रयागराज 27 जनवरी । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिवार अदालत चित्रकूट द्वारा पति से तलाक लिए बगैर दूसरे पति के साथ रहने वाली कथित पत्नी को गुजारा भत्ता देने के आदेश के अमल पर रोक लगा दी है और विपक्षी कथित पत्नी व बच्ची को नोटिस जारी करते हुए तीन हफ्ते में जवाब मांगा है।
आपराधिक पुनरीक्षण याचिका की अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह ने संतोष कुमार की याचिका पर दिया है।
याचिका पर अधिवक्ता का कहना था कि विपक्षी रन्नो उसकी वैध पत्नी नहीं है। इसलिए उसके पक्ष में परिवार अदालत का गुजारा भत्ता देने का आदेश विधि विरूद्ध है।
विपक्षी की शादी शारदा प्रसाद से हुई थी। उससे कोर्ट के जरिए तलाक नहीं लिया और याची के साथ बतौर पत्नी रहने लगी। उसने धारा 125 सीआरपीसी में परिवार अदालत में अर्जी दी जिस पर प्रधान न्यायाधीश ने विपक्षी पत्नी को दो हजार व बच्ची को एक हजार रुपये प्रति माह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया। जिसे चुनौती दी गई।
याची अधिवक्ता का कहना था कि विपक्षी उसकी वैध पत्नी नहीं है तो उसे गुजारा भत्ता पाने का अधिकार नहीं है। उसने स्वीकार किया है कि शादी की है किन्तु शादी में सप्तपदी नहीं हुई थी। इसलिए परिवार अदालत का आदेश रद्द किया जाय। कोर्ट ने मुद्दा विचारणीय माना और प्रधान न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगाते हुए विपक्षियों से याचिका पर जवाब मांगा है।