उप्र की राजनीति के केन्द्र बिंदु में है निषाद पार्टी: डॉ. संजय निषाद
दस वर्ष में मछुआ समाज को गुलाम समझने की मानसिकता से पाई मुक्ति

प्रयागराज, 02 अप्रैल (हि.स.)। निषाद पार्टी का गठन मछुआ समाज की राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षिक एवं आर्थिक उत्थान और हमारी संस्कृति व विरासत को पुनर्जीवित करने के लिए किया गया था। बीते दस वर्ष में ना जाने कितनी कठिनाई व मुश्किलों का सामना करते हुए निषाद पार्टी उत्तर प्रदेश की राजनीति के केन्द्र बिंदु में है। मोदी व योगी सरकार में मछुआरा समाज के प्रति सम्मान के साथ मछुआ समाज को ग़ुलाम समझने की मानसिकता से मुक्ति पाई है।
यह बातें बुधवार को निषाद पार्टी के दो दिवसीय सम्मेलन के अन्तिम दिन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व कैबिनेट मंत्री डॉ.संजय कुमार निषाद ने कहा। उन्होंने कहा कि केन्द्र की मोदी व प्रदेश में योगी सरकार के कार्यकाल में मछुआ समाज की सभी उपजातियों की सुरक्षा, समृद्धि व ख़ुशहाली का जो सपना निषाद पार्टी बनाते समय हमारे कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों ने देखा था, आज वो धीरे-धीरे पूर्ण होता दिख रहा है। मछुआ समाज को पहले तुच्छ व तृष्णा की भावनाओं से देखा जाता था, बार-बार समाज में जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए अपमानित किया जाता था। किंतु 10 वर्षों में हमने केवटा, मल्हवा, बिंदवा से निषाद जी तक के सफ़र तय करने में मछुआ समाज को ग़ुलाम समझने की मानसिकता से मुक्ति पाई है।
उन्होंने कहा कि जब मैंने अपने कुछ साथियों से बताया कि इस बार का राष्ट्रीय अधिवेशन हम श्रृंगवेरपुर धाम पर करने जा रहे हैं, तो मुझे कुछ लोगों ने कहा कि राजनीति और धर्म को दूर रखते हुए श्रृंगवेरपुर में आप अपना राष्ट्रीय अधिवेशन को दिल्ली या लखनऊ में आयोजित करिए। जिससे की राजनीतिक लाभ भी निषाद पार्टी को मिलेगा। किंतु मैंने स्पष्ट मना करते हुए कहा की मुझे राजनीति नहीं अपने धर्म और संस्कृति को जन-जन तक प्रचारित करने के लिए सब कुछ न्योछावर करने को भी तैयार हैं।
उन्होंने कहा की निषाद पार्टी ने इन 10 साल में महाराज गुह्यराज निषाद की महान सांस्कृतिक विरासत का सम्मान रखते हुए, प्रदेश सरकार में 03 वर्षों में संवैधानिक पद (मंत्री) बनने के पश्चात उन्होंने प्रदेश के मछुआ समाज के विकास के लिए कई नीतियों में भारी विरोध के बाद बदलाव करते हुए आज मछुआ समाज प्रदेश में मत्स्य पालन क्षेत्र में अव्वल है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना, प्रधानमंत्री मछुआ दुर्घटना बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड (मत्स्य पालन हेतु), निषाद राज बोट योजना, माता सुकेता केज कल्चर, मत्स्य पालक कल्याण कोष के अन्तर्गत (शिक्षा, चिकित्सा, विवाह, आवास, हाई मास्क लाइट, दैवीय आपदा समते अन्य मदों में) मछुआ समाज के लिए विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक परम्पराओं के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान किया जा रहा है।
निषाद पार्टी के मीडिया प्रभारी राजीव यादव ने बताया कि सम्मेलन के दूसरे दिन बुधवार को निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल “निषाद पार्टी” के दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का दूसरे दिवस पर राष्ट्रीय अध्यक्ष निषाद पार्टी एवं कैबिनेट मंत्री डॉ संजय कुमार निषाद ने श्रृंगवेरपुर धाम के राम-केवट घाट पर माँ गंगा में स्नान किया तत्पश्चात उन्होंने मंदिर में जाकर पूजा अर्चना करते हुए देश-प्रदेश की ख़ुशहाली की कामना की।
अधिवेशन के दूसरे दिन राजनीतिक प्रस्ताव, आरक्षण पर प्रस्ताव पर राष्ट्रीय अध्यक्ष-निषाद पार्टी ने चर्चा करते हुए कहा कि निषाद पार्टी का गठन मछुआ समाज की राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षिक व आर्थिक उत्थान और हमारी संस्कृत व विरासत को पुनर्जीवित करने के लिए किया गया था।
एनडीए के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ेगी निषाद पार्टी
राष्ट्रीय अधिवेशन में दूसरे दिन चार प्रस्ताव पास हुए। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण फैसला आगामी विधानसभा चुनाव बिहार राज्य में एनडीए के नेतृत्व में लड़ेगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष निषाद पार्टी को राष्ट्रीय व प्रदेश कमेटी बिहार राज्य ने चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी से सीट को लेकर अधिकृत करने का फैसला किया है।
दूसरा प्रस्ताव निष्क्रिय पदाधिकारियों का निष्कासन और निलम्बन उनके काम के आधार पर किया जायेगा, अगर कोई पदाधिकारी अपने पद का दायित्व सही से निर्वहन नहीं कर रहा है तो उनका पद स्वत: समाप्त माना जाएगा। तीसरा प्रस्ताव में पार्टी के विस्तार हेतु दूसरे राज्यों में प्रचार-प्रसार के लिए उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों की प्रादेशिक टीम को राष्ट्रीय कमेटी में भेजा जाएगा जिससे उत्तर प्रदेश की भाँति दूसरे राज्यों में भी पार्टी का विस्तार हो सके। चौथा प्रस्ताव राष्ट्रीय महासचिव, राष्ट्रीय सचिव, व राष्ट्रीय कमेटी के अन्य पदों में विस्तार कर राष्ट्रीय कमेटी का विस्तार किया जाएगा।
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