प्रयागराज में चिकित्सा क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि: बिना बड़े ऑपरेशन के एओर्टिक एन्यूरिज़्म का सफल उपचार
प्रयागराज में चिकित्सा क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि: बिना बड़े ऑपरेशन के एओर्टिक एन्यूरिज़्म का सफल उपचार
प्रयागराज, 18 अप्रैल । चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्रयागराज में हासिल की गई है। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं उससे संबद्ध स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल में पहली बार अत्याधुनिक एंडोवास्कुलर एनेयूरिज़्म रिपेयर (ईवीएआर) तकनीक के माध्यम से एओर्टिक एन्यूरिज़्म का सफल उपचार किया गया। यह जानकारी शनिवार मेडिकल कॉलेज के सह आचार्य डॉ संतोष सिंह ने दी।
उन्होंने बताया कि इस सुविधा के उपलब्ध होने से अब क्षेत्र के गंभीर रोगियों को महानगरों की ओर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
उन्होंने बताया कि कौशांबी निवासी कंधई लाल (73) 8 अप्रैल को सीने, पेट एवं पीठ में दर्द की शिकायत के साथ कार्डियोलॉजी विभाग पहुंचे थे। प्रारंभिक जांच के उपरांत विस्तृत परीक्षण में उनकी मुख्य धमनी (एओर्टा) में गंभीर एन्यूरिज़्म पाया गया, जो किसी भी समय फटकर जानलेवा स्थिति उत्पन्न कर सकता था। मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्डियोलॉजी, सर्जरी, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी एवं एनेस्थीसिया विभागों के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम गठित कर उपचार की रणनीति बनाई गई। पारंपरिक ओपन सर्जरी के स्थान पर आधुनिक ईवीएआर तकनीक अपनाई गई, जिसमें जांघ की धमनी के माध्यम से स्टेंट-ग्राफ्ट स्थापित कर एओर्टा के प्रभावित भाग को सुरक्षित किया गया। इस प्रक्रिया से एन्यूरिज़्म को रक्त प्रवाह से अलग कर उसके फटने की संभावना को कम किया गया।
उल्लेखनीय है कि यह संपूर्ण प्रक्रिया बिना बड़े चीरे के सफलतापूर्वक सम्पन्न की गई और वर्तमान में मरीज की स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
कार्डियोलॉजी विभाग के चिकित्सकों डॉ. मोहम्मद शाहिद, डॉ. अभिषेक सचदेवा एवं डॉ. विनय पांडेय ने प्रारंभिक जांच एवं उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विभागाध्यक्ष डॉ. पियूष सक्सेना तथा सहायक प्राध्यापक डॉ. निकेश मिश्रा का मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ।
इस जटिल प्रक्रिया को इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. पुषन शर्मा द्वारा सफलतापूर्वक सम्पन्न किया गया। सर्जरी विभाग से कार्डियोवैस्कुलर एवं थोरेसिक सर्जन डॉ. विकास सचदेवा, प्लास्टिक सर्जन डॉ. मोहित जैन तथा विभागाध्यक्ष डॉ. वैभव श्रीवास्तव का विशेष योगदान रहा। एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. अनिल सिंह ने भी प्रक्रिया के दौरान महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वी. के. पांडेय ने इसे संस्थान के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि अब इस प्रकार के जटिल उपचार स्थानीय स्तर पर ही संभव हो सकेंगे।
वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक सचदेवा ने बताया कि एओर्टिक एन्यूरिज़्म एक गंभीर रोग है, जो प्रायः बिना लक्षण के विकसित होता है। 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों, उच्च रक्तचाप के मरीजों एवं धूम्रपान करने वालों को नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। पेट या पीठ में अचानक तीव्र दर्द होने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेना आवश्यक है।