दारुल उलूम वारसिया मदरसे में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस: अल्पसंख्यक राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी ने छात्रों संग किया योग अभ्यास
दारुल उलूम वारसिया मदरसे में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस: अल्पसंख्यक राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी ने छात्रों संग किया योग अभ्यास
लखनऊ, 21 जून। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के पावन अवसर पर, उत्तर प्रदेश सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री और साथ ही उप्र राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष, दानिश आजाद अंसारी ने एक महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायक पहल की। उन्होंने शुक्रवार को लखनऊ के गोमती नगर क्षेत्र में स्थित प्रतिष्ठित दारुल उलूम वारसिया मदरसे का दौरा किया। यहां उन्होंने मदरसे के छात्रों और अन्य उपस्थित लोगों के साथ मिलकर योग अभ्यास सत्र में पूरी सक्रियता के साथ भाग लिया और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के महत्व को रेखांकित किया।
योग सत्र में मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने विभिन्न योगासनों का अभ्यास करते हुए छात्रों का उत्साहवर्धन किया। छात्रों ने भी इस अनूठे अवसर पर योग गुरुओं के निर्देशन में पूरे मन से योग क्रियाओं में हिस्सा लिया। सत्र की समाप्ति के बाद, मंत्री ने मदरसे के विद्यार्थियों और शिक्षकों से संवाद किया और उन्हें योग के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने स्वस्थ जीवन शैली के लिए योग की नियमितता के महत्व पर जोर दिया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में, मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि "हम सब, जो इस महान भारत भूमि पर निवास करते हैं, भारतीय हैं। योग का उद्भव और विकास इसी पावन धरा, भारत में हुआ है। यह हमारी एक साझा व समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।" उन्होंने आगे कहा, "इसलिए, यह प्रत्येक भारतीय नागरिक का दायित्व है कि वह योग को अपना माने और इसे अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाए। योग किसी धर्म या समुदाय विशेष का न होकर संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए एक भारतीय देन है।"
उन्होंने विशेष रूप से छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि नियमित रूप से योग का अभ्यास करने से उनमें न केवल शारीरिक स्फूर्ति और ऊर्जा बनी रहती है, बल्कि उनकी एकाग्रता (चेतना) भी बढ़ती है, जो उनकी पढ़ाई और समग्र विकास के लिए अत्यंत लाभकारी है। मंत्री ने कहा कि योग तनाव कम करने और मन को शांत रखने में भी सहायक है, जिससे छात्र कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
दारुल उलूम वारसिया मदरसे जैसे पारंपरिक शैक्षणिक संस्थान में अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले एक मंत्री द्वारा योग का समर्थन और स्वयं अभ्यास करना, 'सबका साथ, सबका विकास' और सांस्कृतिक समन्वय के संदेश को और अधिक मजबूती देता है। यह कार्यक्रम दर्शाता है कि योग कैसे विभिन्न समुदायों और वर्गों को स्वास्थ्य और सांस्कृतिक गौरव के सूत्र में पिरो सकता है। इस आयोजन ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के संदेश को समाज के विभिन्न वर्गों तक सफलतापूर्वक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।