प्रयागराज में लंबित विकास कार्यों और प्रशासनिक मुद्दों पर महत्वपूर्ण बैठक: जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच सीधा संवाद स्थापित
प्रयागराज में लंबित विकास कार्यों और प्रशासनिक मुद्दों पर महत्वपूर्ण बैठक: जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच सीधा संवाद स्थापित
प्रयागराज, 19 जून । प्रयागराज स्थित सर्किट हाउस में हाल ही में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य जनपद में विभिन्न स्तरों पर चल रहे विकास कार्यों की गति की समीक्षा करना और उन परियोजनाओं या कार्यों को संज्ञान में लाना था जो किसी कारणवश अभी भी अपूर्ण हैं अथवा जिनमें अपेक्षित गति नहीं आ पा रही है। इस बैठक में प्रयागराज के माननीय जन प्रतिनिधियों (विधायकगण और संभवतः सांसद) और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने एक साथ बैठकर सीधे संवाद स्थापित किया। इस संवाद के माध्यम से प्रयागराज से संबंधित विभिन्न समस्याओं और चुनौतियों को गंभीरतापूर्वक सुना गया और उनके समाधान हेतु प्रारंभिक चर्चा हुई।

प्रयागराज में बुधवार को एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य विभिन्न सरकारी विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना था। सर्किट हाउस के सभागार में आयोजित इस बैठक में पुलिस विभाग, राजस्व विभाग, नगर निगम, प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA), विद्युत विभाग, स्वास्थ्य विभाग, जल जीवन मिशन, सेतु निगम, वन विभाग, पर्यटन विभाग, स्मार्ट सिटी परियोजना और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में प्रत्येक विभाग से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई, ताकि विकास कार्यों को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया जा सके और जनहित में बेहतर निर्णय लिए जा सकें।

जिलाधिकारी श्री रविन्द्र कुमार माँदड़ ने बैठक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि जनप्रतिनिधि जनता से जुड़े मुद्दों को बेहतर ढंग से समझते हैं और उनके सुझावों से जिले के विकास की योजना बनाने में मदद मिलती है। जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि इस प्रकार की नियमित बैठकों का आयोजन जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों के त्वरित समाधान के लिए किया जाएगा, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी और विभिन्न विभागों से संबंधित कार्यों की प्रगति पर निगरानी रखी जा सकेगी।

जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने विभागों से संबंधित विषयों को गंभीरता से लें और उनका समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करें। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी (CDO) को इस कार्य की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नामित किया। नोडल अधिकारी बैठक से संबंधित सभी कार्यवाहियों का विवरण तैयार करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि जनप्रतिनिधियों से संबंधित विषयों का समाधान होने पर उन्हें इसकी सूचना दी जाए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के कार्यालयों से प्राप्त संदर्भों पर भी त्वरित कार्यवाही करने और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, जनप्रतिनिधियों से संबंधित प्रकरणों को एक रजिस्टर में दर्ज करने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि सभी मामलों पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके। जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखने और उनके पत्रों व बैठकों को गंभीरता से लेने के लिए निर्देशित किया, ताकि एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया जा सके।

बैठक में जनप्रतिनिधियों ने पुलिस विभाग से आग्रह किया कि वे जनता से संबंधित विषयों पर गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ नियमानुसार कार्यवाही करें। उन्होंने सभी थानों के थानाध्यक्षों की जनप्रतिनिधियों और अपर पुलिस आयुक्त (Additional Commissioner of Police) के साथ एक संयुक्त बैठक आयोजित करने का सुझाव दिया, ताकि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए जनता से संबंधित मामलों का समय पर निस्तारण किया जा सके।
जनप्रतिनिधियों ने झूंसी, नैनी, फाफामऊ और झलवा में जमीनों पर लोगों द्वारा किए जा रहे अवैध अतिक्रमण को गंभीरता से लिया और भूमाफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। अपर पुलिस आयुक्त ने जनप्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि इस विषय को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित थानों के थानाध्यक्षों को आवश्यक कार्यवाही करने के लिए निर्देशित किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जमीनों पर अवैध कब्जों और निर्माण कार्यों के मामले में संबंधित चौकी इंचार्ज और लेखपाल की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
बैठक में पीडब्लूडी विभाग से संबंधित प्रकरणों पर चर्चा के दौरान, जनप्रतिनिधियों ने सड़कों की खराब गुणवत्ता के कारण उनके शीघ्र उखड़ने पर चिंता जताई। उन्होंने यह भी बताया कि ग्रामीण अभियंत्रण सेवा (आरईएस) द्वारा निर्मित सड़कों की मरम्मत नहीं हो पा रही है। इसके अतिरिक्त, जनप्रतिनिधियों द्वारा सड़क निर्माण हेतु दिए गए प्रस्तावों को कई बार शामिल नहीं किया जाता है। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित पीडब्लूडी अभियंताओं को ऐसी सड़कों का तत्काल निरीक्षण कर उनकी मरम्मत कराने, आरईएस की सड़कों को पीडब्लूडी के अधीन लेने और भविष्य में बनने वाले प्रस्तावों में जनप्रतिनिधियों के सुझावों को अनिवार्य रूप से शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से यह भी आग्रह किया कि वे सड़क संबंधित कोई भी प्रस्ताव देते समय, संबंधित अधिशाषी अभियंताओं से उसका एस्टीमेट पहले से ही तैयार करवा लें।
आबकारी और राजस्व मुद्दे
बैठक में मॉडल शराब की दुकानों के बाहर सार्वजनिक स्थानों पर लोगों द्वारा शराब पीने की शिकायत पर भी ध्यान दिया गया। जिलाधिकारी ने जिला आबकारी अधिकारी को ऐसी दुकानों को नोटिस जारी करने और मॉडल दुकानों के बाहर शराब पीने पर प्रभावी रोक लगाने हेतु निरंतर भ्रमण कर निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। राजस्व विभाग की समीक्षा के दौरान, जनप्रतिनिधियों ने धारा-24 के तहत भूमि पैमाइश के कार्य में अनावश्यक देरी और सही ढंग से निष्पादन न होने की बात कही। इस गंभीर मुद्दे पर जिलाधिकारी ने सभी उपजिलाधिकारियों एवं तहसीलदारों को सख्त निर्देश दिए कि 25 जून तक धारा-24 के तहत लंबित सभी पैमाइश प्रकरणों का अनिवार्य रूप से निस्तारण किया जाए। इसी क्रम में, पट्टा आवंटित होने के बावजूद लाभार्थियों को कब्ज़ा न मिलने के प्रकरणों पर जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारियों को 30 जून तक अभियान चलाकर कब्ज़ा दिलाने का निर्देश दिया। नई प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्धता सुनिश्चित कराने के मामलों को तत्काल निस्तारित करने के भी निर्देश दिए गए। माननीय सांसद महोदय द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में जल-जमाव की समस्या को प्राथमिकता पर हल करने के आग्रह पर, जिलाधिकारी ने जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) को 30 जून तक ग्रामीण क्षेत्रों की नालियों की अनिवार्य रूप से सफाई कराने के निर्देश दिए।
विद्युत और अन्य विभाग
विद्युत विभाग से संबंधित चर्चा में, जनप्रतिनिधियों ने ट्रांसफार्मर का बार-बार खराब होना, गलत विद्युत बिल जारी होना और बड़े पैमाने पर अघोषित बिजली कटौती जैसी समस्याओं पर प्रकाश डाला। जिलाधिकारी ने विद्युत विभाग के अभियंताओं को इन प्रकरणों पर प्राथमिकता से कार्रवाई करने और की गई कार्रवाई से जनप्रतिनिधियों को भी अवगत कराने के निर्देश दिए। ट्रांसफार्मरों के बार-बार खराब होने के कारणों की जांच हेतु, मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित की गई है, जिसमें अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी सदस्य नामित किए गए हैं। यह समिति खराब हुए ट्रांसफार्मरों की संख्या, उनके अपेक्षित जीवनकाल और मल्टीपल पेमेंट की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। जिलाधिकारी ने ओवरलोड ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि करने तथा नए तैयार हुए उपकेंद्रों को शीघ्र क्रियाशील करने के भी निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग के तहत, भगवतपुर स्थित 100 बेड के अस्पताल में 15 दिनों के भीतर ग्रामीण के बजाय शहरी फीडर से विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश मुख्य चिकित्साधिकारी एवं संबंधित विद्युत अभियंता को दिए गए। जल जीवन मिशन की समीक्षा में सोलर पैनलों की चोरी की शिकायत पर सीसीटीवी कैमरे लगाने और प्रयागराज विकास प्राधिकरण को महाकुम्भ के अपूर्ण कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश भी बैठक में दिए गए।
विधायक हर्ष वर्धन बाजपेयी का दृष्टिकोण: एक सराहनीय और ऐतिहासिक पहल
इस बैठक के संबंध में अपना दृष्टिकोण साझा करते हुए स्थानीय विधायक श्री हर्ष वर्धन बाजपेयी ने इसे एक अत्यंत सराहनीय और सार्थक पहल के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पिछले लगभग आठ वर्षों में किसी जिलाधिकारी द्वारा इस तरह की व्यापक और समस्या-समाधान उन्मुख बैठक का आयोजन संभवतः पहली बार किया गया है, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण कदम है। बैठक का माहौल अत्यंत सकारात्मक और ऊर्जावान था, जिसने सभी प्रतिभागियों को खुलकर अपने विचार और मुद्दे रखने का अवसर प्रदान किया। यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता था कि प्रशासन के अधिकारीगण बैठक में उठाए गए मुद्दों और लंबित पड़े कामों को पूरी गंभीरता और एकाग्रता से नोट कर रहे थे। विलंबित या अप्रारंभित कार्यों के कारणों पर अधिकारियों द्वारा एक प्रकार का दबाव महसूस किया जाना स्वाभाविक था, जो उनकी जवाबदेही को दर्शाता है।
विधायक जी ने एक छोटी सी, लेकिन महत्वपूर्ण समस्या का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे मात्र दो बिजली के खंभे स्थापित न होने के कारण एक महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाई (फैक्ट्री) का काम रुका पड़ा था। ऐसे छोटे मुद्दे भी, जब सीधे संज्ञान में लाए जाते हैं, तो उनका त्वरित समाधान संभव हो पाता है। श्री बाजपेयी का दृढ़ विश्वास है कि यदि इस तरह की बैठकें नियमित आधार पर (जैसे कि मासिक रूप से) आयोजित की जाती हैं, तो सरकारी तंत्र में व्याप्त लाल-फीता-शाही (Red-tapism) काफी हद तक कम हो जाएगी। इससे न केवल वर्षों से लंबित पड़े कार्य त्वरित गति से पूरे हो सकेंगे, बल्कि जनता और प्रशासन के बीच विश्वास का माहौल भी सुदृढ़ होगा। कुल मिलाकर, बैठक का अनुभव बेहद सकारात्मक रहा और इससे प्रयागराज में विभिन्न विकास कार्यों के निपटारे में तेजी आने की प्रबल संभावना है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर, विशेष रूप से सड़कों पर लगी लाइटों के नियमित और प्रभावी रखरखाव की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनका कहना था कि चाहे लाइटें फ्यूज हो गई हों या किसी तकनीकी खराबी के कारण बंद हों, उनके तत्काल प्रतिस्थापन या मरम्मत को सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि नागरिकों को असुविधा न हो और सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे।
जिलाधिकारी का वक्तव्य: मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप 'स्वच्छ एवं पारदर्शी प्रशासन' की स्थापना
जिलाधिकारी महोदय ने बैठक के आयोजन के पीछे राज्य सरकार और माननीय मुख्यमंत्री जी की स्पष्ट मंशा को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री जी का यह दृढ निर्देश है कि प्रदेश के प्रशासन को अधिकतम स्वच्छ, पारदर्शी, संवेदनशील और जन-जवाबदेह बनाया जाए। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, प्रशासनिक अधिकारियों और जनता द्वारा चुने हुए जन प्रतिनिधियों के बीच निरंतर, सीधा और अर्थपूर्ण संवाद स्थापित होना नितांत आवश्यक है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पूर्व में जनपद में एक बड़े और व्यापक जन-आयोजन (संभवतः कुम्भ या किसी अन्य प्रमुख उत्सव) की तैयारियों और सफल संपादन में सभी प्रशासनिक अधिकारी व्यस्त थे, जिसके कारण नियमित रूप से इस प्रकार की समन्वय बैठकें आयोजित नहीं हो पाई थीं। किन्तु अब, एक नई और महत्वपूर्ण परंपरा का सूत्रपात करते हुए, यह निर्णय लिया गया है कि हर महीने नियमित रूप से ऐसी विस्तृत बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन मासिक समीक्षा बैठकों में न केवल पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण अपितु सभी उप-जिलाधिकारी (SDMs) और विभिन्न सरकारी विभागों के प्रमुख अधिकारी भी अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे। इसके साथ ही, प्रयागराज क्षेत्र के सभी माननीय विधायकगण और सांसद जी भी इन बैठकों का अभिन्न अंग होंगे।
इन बैठकों का सबसे मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रशासनिक अधिकारीगण जनता और उनके चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए विभिन्न मुद्दों, समस्याओं और सुझावों को पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता से सुनें। इतना ही नहीं, अपितु वे इन मुद्दों को अपनी दिन-प्रतिदिन की कार्ययोजनाओं, प्रशासनिक निर्णय और प्राथमिकताओं में सर्वोपरि स्थान दें ताकि उनका समयबद्ध और प्रभावी समाधान सुनिश्चित हो सके। यह भी अत्यंत महत्वपूर्ण है कि प्रशासन और पुलिस व्यवस्था के संबंध में माननीय जन प्रतिनिधियों का सीधा, निष्पक्ष और खुला फीडबैक प्राप्त किया जा सके। इस तरह की आमने-सामने की बातचीत और खुले आदान-प्रदान से गलतफहमियां दूर होती हैं, प्रशासनिक कमियों को तुरंत पहचाना जा सकता है और व्यवस्था में लगातार सुधार लाया जा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया का अंतिम लक्ष्य वही है जो सरकार और माननीय मुख्यमंत्री जी की सुशासन नीति का केंद्र बिंदु है: प्रयागराज जनपद में एक स्वच्छ, पारदर्शी, जवाबदेह, कुशल और जन-केंद्रित प्रशासन प्रदान करना।
कुल मिलाकर, यह बैठक प्रयागराज के विकास और सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे लंबित कार्यों के शीघ्र निस्तारण और प्रशासनिक जवाबदेही में वृद्धि की आशा बलवती हुई है।