आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश में अपने दम पर लड़ेगी पंचायत चुनाव: संजय सिंह

संजय सिंह ने सरकार पर साधा निशाना; रोजगार, शिक्षा और महाकुंभ भगदड़ पर उठाए सवाल

आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश में अपने दम पर लड़ेगी पंचायत चुनाव: संजय सिंह

प्रयागराज, 19 जूनआम आदमी पार्टी (आप) के उत्तर प्रदेश प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने राजधानी लखनऊ में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित कर प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति और सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे हमले किए। इस दौरान उन्होंने पार्टी की चुनावी रणनीति, सामाजिक मुद्दों, छात्रों के आंदोलन और महाकुंभ भगदड़ से जुड़े गंभीर मसलों पर अपनी बात रखी।

पंचायत चुनाव की रणनीति:

संजय सिंह ने स्पष्ट किया कि आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी पंचायत चुनाव पूरी ताकत और अपने दम पर लड़ेगी। उन्होंने बताया कि इन चुनावों में पार्टी की ओर से पूरी तैयारी की जा रही है और संगठन को गांव-गांव तक मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि पंचायत चुनाव के अनुभव और परिणाम के आधार पर ही पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व आगामी विधानसभा चुनाव के लिए आगे की रणनीति पर बैठकर चर्चा करेगा और उसके बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

सामाजिक न्याय और गांव तक पहुंच:

आप नेता ने कहा कि पार्टी लगातार जनता के बीच पहुंच रही है और संगठन का विस्तार कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को उठाने की बात कही। संजय सिंह ने कोल और मुसहर जाति के लोगों को अभी तक अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा न दिए जाने का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया और कहा कि आम आदमी पार्टी इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएगी और इन समुदाय के लोगों को उनका हक दिलाने के लिए संघर्ष करेगी।

छात्र आंदोलन और शिक्षक भर्ती पर सरकार को घेरा:

संजय सिंह ने सरकार को छात्रों के आंदोलन को लेकर भी निशाने पर लिया। उन्होंने छात्रों के आंदोलन को पूरी तरह से जायज ठहराते हुए कहा कि पिछले सात वर्षों में राज्य में कोई बड़ी शिक्षक भर्ती नहीं हुई है, जिससे लाखों युवा बेरोजगार बैठे हैं और अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की मांगों को सुनने के बजाय लोकतंत्र में हो रहे इस जायज आंदोलन को लाठी के दम पर कुचलने का प्रयास कर रही है, जो बेहद निंदनीय है।

नाम बदलने की राजनीति पर कड़ा प्रहार:

सरकार द्वारा शहरों, बस अड्डों और अन्य सार्वजनिक स्थानों के नाम बदलने की प्रवृत्ति पर संजय सिंह ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे "नौटंकीबाज़ ड्रामा" करार दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के दिखावे से किसी को कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है और यह जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने का प्रयास है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि अगर नाम बदलने का इतना ही शौक है तो भाजपा नेताओं को अपना और अपने बच्चों सहित पूरे परिवार का नाम बदल लेना चाहिए। उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें जिस चीज में खुशी मिलती है, वह करें, लेकिन साथ ही लोगों को रोजगार दें, शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाएं और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति संवेदनशील बनें। उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का नाम बदलकर 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' रखे जाने का जिक्र करते हुए कहा कि केवल नाम बदलने से व्यवस्था नहीं सुधरती। उन्होंने आरोप लगाया कि ये 'मंदिर' आज भी कूड़े के अड्डे बने हुए हैं और वहां कोई उचित व्यवस्था नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाम बदलने की इस नौटंकी से न किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिल रहा है और न ही युवाओं को रोजगार मिल रहा है। आम आदमी पार्टी इस नाम बदलने वाली राजनीति का पूर्ण रूप से विरोध करती है।

महाकुंभ भगदड़: मौतों के आंकड़े छिपाने का आरोप:

संजय सिंह ने प्रयागराज में हुए महाकुंभ के दौरान हुई भगदड़ में हुई मौतों के आंकड़ों को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल 37 मौतों को सरकारी तौर पर स्वीकार किया है और उन्हीं के परिजनों को मुआवजा दिया है, जबकि हकीकत में भगदड़ में 82 लोगों की जान गई थी। उन्होंने दावा किया कि सरकार के ही कैमरों में यह भयावह घटना और अधिक मौतों की तस्वीर कैद हुई है, इसके बावजूद सरकार इन मौतों को स्वीकार नहीं कर रही है। उन्होंने पुलिस पर लीपापोती का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिसकर्मी पीड़ित परिवारों के पास जाकर उन्हें 5,000 रुपये पकड़ाते हैं और दबाव डालते हैं कि वे यह स्वीकार न करें कि उनके परिजन भगदड़ में मारे गए थे। संजय सिंह ने इस मामले की गंभीरता बताते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे केएन गोविंदाचार्य के भाई का उदाहरण दिया, जिनकी भगदड़ में मौत हुई और उन्हें भी 'लावारिस' सूची में शामिल कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह घटना दर्शाती है कि जो पार्टी अपने नेता की नहीं हुई, वह जनता की क्या होगी?

उच्च-स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग:

आप सांसद संजय सिंह ने महाकुंभ भगदड़ मामले की उच्च-स्तरीय जांच कराने की पुरजोर मांग की। उन्होंने कहा कि जांच के बाद जो भी अधिकारी या लोग इन मौतों के आंकड़ों को छिपाने या मामले की लीपापोती करने के दोषी पाए जाते हैं, उन्हें तत्काल सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके।