वैश्विक शिक्षा और भारत-रूस शैक्षणिक सहयोग का मजबूत मंच बना आईआरईएस-2026 : कुलपति

वैश्विक शिक्षा और भारत-रूस शैक्षणिक सहयोग का मजबूत मंच बना आईआरईएस-2026 : कुलपति

वैश्विक शिक्षा और भारत-रूस शैक्षणिक सहयोग का मजबूत मंच बना आईआरईएस-2026 : कुलपति

कानपुर, 28 मई । भारत और रूस के बीच शैक्षणिक साझेदारी, शोध सहयोग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षा मॉडल युवाओं को वैश्विक अवसरों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। विश्वविद्यालयों को समय के अनुरूप नवाचार आधारित शिक्षा और तकनीकी शोध को बढ़ावा देना होगा। यह बातें गुरुवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के कुलपति एवं भारतीय विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहीं।

नई दिल्ली में आज इंडो-रशियन एजुकेशन समिट 2026 का शुभारंभ हुआ। दो दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत और रूस के शिक्षा, चिकित्सा एवं अनुसंधान क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठित शिक्षाविद, नीति-निर्माता और विशेषज्ञ शामिल हुए।

उद्घाटन एवं स्वागत सत्र को संबोधित करते हुए प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि विश्वविद्यालयों को वैश्विक मानकों के अनुरूप शिक्षा, शोध और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आधुनिक चिकित्सा शोध और डिजिटल शिक्षण उपकरण शिक्षा जगत को तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में विश्वविद्यालयों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षण व्यवस्था और शोध केंद्रित शिक्षा को अपनाना होगा।

उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच शैक्षणिक साझेदारी, छात्र विनिमय कार्यक्रम और संयुक्त शोध पहल युवाओं के लिए नए अवसर तैयार करेंगे। सम्मेलन में उच्च शिक्षा, चिकित्सा विज्ञान, शोध सहयोग और वैश्विक शैक्षणिक साझेदारी जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम में भारत में रूसी संघ के राजदूत डेनिस अलीपोव, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अभिजात चंद्रकांत शेट, भारतीय विश्वविद्यालय संघ के महासचिव डॉ. पंकज मित्तल समेत कई शिक्षाविद और नीति-निर्माता मौजूद रहे।