तकनीक के दौर में तेजी से हो रहा है हिंदी भाषा का विकास: जे.एन.मिश्र
तकनीक के दौर में तेजी से हो रहा है हिंदी भाषा का विकास: जे.एन.मिश्र
प्रयागराज,12 सितंबर विदेशों में भी हिन्दी भाषा का प्रसार हुआ है। तकनीक के दाैर में हिंदी भाषा तेजी से आगे बढ़ रही है। यह बात शुक्रवार को एनजीबीयू में राष्ट्रभाषा हिन्दी, चुनौतियां और समाधान संगोष्ठी को संबोधित करते हुए संस्थान के संस्थापक कुलाधिपति जे.एन.मिश्र ने कहा।
नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के द्वारा विचार गोष्ठी राष्ट्रभाषा हिन्दी: चुनौतियॉं और समाधान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ.रविनन्दन सिंह ने कहा कि भाषा राजनीति का हथियार बनती जा रही है यह सबसे बड़ी चुनाैती है। भाषा विचार विनिमय का सबसे सशक्त माध्यम है। भाषा न रहेगी ताे केवल ध्वनियाँ ही रहेंगी। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ० हिमांशु शेखर सिंह ने विचार गाेष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत की। डी एकेडमिक डॉ. राजेश तिवारी ने स्वागत भाषण दिया। इस अवसर पर कुलपति प्राे. राेहित रमेश एवं प्रति कुलपति डॉ. एस.सी. तिवारी ने निबंध प्रतियोगिता में व वाद-विवाद प्रतियोगिता के प्रतिभागियों काे प्रमाण पत्र प्रदान किया।
निबंध प्रतियोगिता में प्रथम काजल कुशवाहा, द्वितीय नेहा यादव, तृतीय काजल पाण्डेय। वाद विवाद प्रतियोगिता में प्रथम रिया त्रिपाठी, द्वितीय मांसी यादव एवं तृतीय निष्ठा दुबे रहीं। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. हमांशु शेखर सिंह ने एवं संचालन डॉ. राघवेंद्र मालवीय ने किया। इस अवसर पर डीन कला संकाय डॉ. सव्यसाची, डॉ. ममता मिश्रा, डॉ. विष्णु शुक्ला, डॉ. भूप नारायण, डॉ. मंजू शुक्ला, डॉ. राजीव वर्मा सहित बड़ी संख्या में शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में कवि सम्मेलन आयाेजित किया गया। कवि सम्मेलन में नवल किशाेर ने अपनी कविता में कहा "हिन्दी मेरी शान हिन्दी मेरी जान। हिन्दी ही पहचान है हिन्दी हिन्दुस्तान है।" कवियत्री अकांक्षा बुन्देला ने सुनाया "मेरी माँ से ही मैने ये शकल संसार देखा, दुनिया भर में है सच्चा है इसी का प्यार देखा।" कव्य पाठ किया "धरती के दग्ध हृदय पर संगीत कहॉ लिख दूँ मैं, बिछुड़न की सर्प घटायें हैं ताे प्रीत कहॉ से लिख दूँ मैं।" नजर इलाहाबादी ने "दिलाें की दर्द की टिकिया नहीं हाेती। वह घर, घर नहीं हाेता जहाँ बिटिया नहीं हाेती। शैलेंद्र मधुर ने सुनाया " वर्तमान आप से है, देश के भविष्य भी हैं। चाल और चरित्र में पवित्रता ले आइये।"
कवि संताेष शुक्ला समर्थ, पारूल, संजय पुरुषार्थी, अशाेक बेशरम, डॉ. आभा श्रीवास्तव, डॉ. नीलम शर्मा ने भी काव्य पाठ किया।