हाईकोर्ट का राजस्व परिषद में दाखिल कैविएट प्रक्रिया की खामियों को दूर करने का निर्देश
हाईकोर्ट का राजस्व परिषद में दाखिल कैविएट प्रक्रिया की खामियों को दूर करने का निर्देश
प्रयागराज, 29 दिसम्बर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश ( बोर्ड ऑफ रेवेन्यू) की कैविएट प्रक्रिया में खामियां पाईं हैं और इसे दूर करने के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी किए हैं। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की एकलपीठ ने कहा है कि जब कोई कैविएट दायर किया जाता है तो रेवेन्यू बोर्ड की रजिस्ट्री द्वारा कैविएटर के वकील को नोटिस नहीं भेजा जाता है और इससे प्रक्रिया में समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
मथुरा निवासी त्रिभुवन गोयल की याचिका निस्तारित करते हुए न्यायमूर्ति ने यह टिप्पणी की। याचिका बोर्ड ऑफ रेवेन्यू द्वारा पारित अंतरिम निषेधाज्ञा के खिलाफ है। प्रतिवादी केशव देव केडिया की तरफ से दायर संक्षिप्त जवाबी हलफनामा में दलील दी गई है कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। कोर्ट ने कहा, हम फिलहाल आपत्ति पर फैसला नहीं दे रहे हैं। कोर्ट ने कहा हमने बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के ऑफिस में कैविएट मैनेजमेंट के मुद्दे पर पक्षों को सुना है। चाहे वह प्रयागराज हो या लखनऊ या दो सर्किट बेंच, यहां कैविएट मार्क करने की प्रक्रिया गलत लगती है।
कैविएट दर्ज होने के बाद अपील, रिवीजन या बोर्ड के सामने शुरू की गई अन्य कार्यवाही के मेमो की शुरुआती जांच के दौरान कैविएट को मार्क करने और सूचना देने की कोई प्रक्रिया नहीं है। बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ऑफिस में कोई खास मामला शुरू होने के बाद, अगर कार्यवाही में कोई कैविएट दर्ज किया जाता है, तो उसे मार्क किया जाता है और कागजात संबंधित डिविजनल क्लर्क को भेज दिए जाते हैं, बिना विद्वान वकील या मामला शुरू करने वाली पार्टी को सूचना दिए, चाहे वह रिवीजन, अपील या अन्य कार्यवाही हो। इसके बाद डिविजनल क्लर्क ऑर्डर-शीट के किनारे पर एक दिन पहले एंडोर्समेंट करता है, तब कागजात मोशन हियरिंग के लिए कोर्ट में भेजे जाते हैं। कोर्ट ने बोर्ड ऑफ रेवेन्यू चेयरमैन से कहा है कि सदस्यों के साथ मिलकर इस मामले में जरूरी कदम उठाएं। कोर्ट ने याचिका को प्रतिपक्षी केशव देव केडिया की अन्य याचिका के साथ सम्बद्ध करते हुए अगली सुनवाई के लिए आठ जनवरी की तारीख नियत की है।