सहमति के लिए शादी का झूठा वायदा कर सम्बंध बनाना दुष्कर्म : हाईकोर्ट
आरोपित के खिलाफ चार्जशीट रद्द करने से इंकार
प्रयागराज, 04 नवम्बर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शादी का झूठा वायदा कर यौन सम्बंध बनाने के आरोपित के खिलाफ दायर चार्जशीट को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि अगर शुरू से ही शादी का वायदा झूठा था और एकमात्र उद्देश्य पीड़िता की सहमति हासिल करना था, तो ऐसा यौन सम्बंध बलात्कार की श्रेणी में आयेगा। यह आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना ने दिया।
गोरखपुर के सहजनवां थाना क्षेत्र की पीड़िता ने 17 जनवरी 2024 को रवि पाल, उसके भाई अंकित पाल, पिता महेंद्र पाल और माँ मुन्नी देवी के खिलाफ बलात्कार और साजिश के आरोप में एफआईआर दर्ज कराया था। कहा कि आरोपित ने उससे शादी का झूठा वादा करके 21 नवम्बर 2023 को अपने घर पर, 23 नवम्बर को एक होटल में और फिर दिसम्बर में दिल्ली ले जाकर बार- बार दुष्कर्म किया और 3 जनवरी 2024 को उसे दिल्ली में अकेला छोड़ दिया।
आरोपित रवि पाल ने हाईकोर्ट में धारा 482 सीआरपीसी के तहत याचिका दायर कर चार्जशीट और मुकदमे की कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। उनके वकील ने दलील दी कि सम्बंध सहमति से थे। एफआईआर में देरी हुई है और पीड़िता ने आरोपित को फंसाने के लिए झूठा मामला रचा है।
पीड़िता के अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपित ने शादी का झूठा वायदा कर सम्बंध बनाया था। झूठे वादे पर मिली सहमति से वैध सहमति नहीं कहा जा सकता।
हाईकोर्ट ने कहा कि एफआईआर और पीड़िता के बयानों से साफ जाहिर है कि आरोपित ने शादी का झूठा वादा करके ही उसकी सहमति हासिल की। कोर्ट ने कहा कि यह मामला सहमति से बने यौन सम्बंधों वाला नहीं है, बल्कि झूठे वायदे के आधार पर सहमति ली गई थी, जो प्रथम दृष्टया बलात्कार की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने आरोपित रवि पाल की याचिका खारिज कर दी।