सामूहिक दुष्कर्म केस समझौते के आधार पर हर्जाने के साथ रद्द
-कोर्ट ने कहा, आजकल झूठा मुकदमा दर्ज करवा कर मुकरने का प्रचलन बढ़ा
प्रयागराज, 28 जून । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सामूहिक दुष्कर्म, लूट और धमकी के आरोपों से जुड़े एक मामले में आपराधिक कार्यवाही को समझौते के आधार पर रद्द कर दिया है। अदालत ने इस मामले में दोनों पक्षों पर दो-दो हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया है।
न्यायमूर्ति गौतम चौधरी की एकल पीठ ने बदायूं निवासी मुनीश और दो अन्य लोगों द्वारा दायर याचिका पर यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ताओं पर एक महिला ने सामूहिक दुष्कर्म, लूट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था, जिसके आधार पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान, दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। इसके बाद, याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मामले को रद्द करने की मांग की।
उच्च न्यायालय ने याचिका पर विचार करते हुए और दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते को ध्यान में रखते हुए, याचिकाकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमे को रद्द कर दिया।
हालांकि, अदालत ने इस बात पर गंभीर चिंता व्यक्त की कि आजकल झूठे मुकदमे दर्ज कराने और बाद में मुकर जाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। अदालत ने कहा कि वह इस प्रवृत्ति को नजरअंदाज नहीं कर सकती।
न्यायमूर्ति चौधरी ने कहा कि समझौते के आधार पर मुकदमा तो रद्द किया जा रहा है, लेकिन इसके लिए दोनों पक्षों को हर्जाने के तौर पर दो-दो हजार रुपये तीन सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराने होंगे। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह हर्जाना झूठे मुकदमे दर्ज कराने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लगाया जा रहा है।
यह फैसला ऐसे मामलों में एक नजीर के तौर पर काम कर सकता है, जहां समझौते के आधार पर आपराधिक कार्यवाही रद्द की जाती है, लेकिन झूठे आरोप लगाने वालों पर हर्जाना भी लगाया जाता है।