संघर्ष से सम्मान तक : प्रो. मंगला कपूर को पद्मश्री, समाज के लिए बनीं प्रेरणास्रोत

—12 साल की उम्र में नौकर ने चेहरे पर फेंका तेजाब, 06 साल चला इलाज,37 आपरेशन, संघर्ष से सम्मान तक : प्रो. मंगला कपूर को पद्मश्री, समाज के लिए बनीं प्रेरणास्रोत

संघर्ष से सम्मान तक : प्रो. मंगला कपूर को पद्मश्री, समाज के लिए बनीं प्रेरणास्रोत

वाराणसी, 25 जनवरी । गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की पूर्व प्रोफेसर एवं प्रसिद्ध संगीत शिक्षिका प्रो. मंगला कपूर को पद्मश्री सम्मान से नवाजे जाने की घोषणा की है। उनके इस सम्मान से संगीत जगत और सामाजिक क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। प्रो. कपूर के संघर्षपूर्ण जीवन और कला के प्रति समर्पण को जानने वाले इसे पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी उपलब्धि मान रहे हैं।

संघर्ष से सम्मान तक

महज 12 वर्ष की उम्र में एसिड अटैक की शिकार बनीं मंगला कपूर के जीवन की राह आसान नहीं रही। घर के एक नौकर ने रात लगभग दो बजे उनके चेहरे पर तेजाब फेंक दिया था, जिससे उनका पूरा चेहरा झुलस गया। इस दर्दनाक घटना के बाद उन्हें विभिन्न शहरों में लगभग छह वर्षों तक इलाज कराना पड़ा और 37 शल्य क्रियाएं (ऑपरेशन) कराए गए। अपने जीवन के इस असहनीय दर्द और संघर्ष को उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘सीरत’ में शब्दों में पिरोया है। प्रो. मंगला कपूर लिखती हैं कि कठिनाइयां यहीं समाप्त नहीं हुईं। वर्ष 2007 में एक दुर्घटना में उनकी जांघ की दोनों हड्डियां टूट गईं, जिससे उन्हें लगा कि अब जीवन की यात्रा थम जाएगी। लेकिन पिता से मिली प्रेरणा, माता-पिता का संबल और उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति ने उन्हें फिर से खड़ा कर दिया।

अपने संघर्ष को ही अपनी शक्ति बना लिया

उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से पीएचडी की और अपनी सुरीली आवाज़ के बल पर संगीत जगत में विशेष पहचान बनाई। वर्ष 1982 में उन्हें ‘काशी की लता’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जिसने उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। इसके बाद उन्होंने बीएचयू महिला महाविद्यालय (एमएमवी) में संगीत शिक्षिका के रूप में कार्यभार संभाला और लगभग 30 वर्षों तक विद्यार्थियों को संगीत की शिक्षा दी, साथ ही कई शोध छात्रों का मार्गदर्शन भी किया। हालांकि, जले हुए चेहरे के कारण उन्हें सामाजिक और पेशेवर जीवन में कई बार उपेक्षा और असंवेदनशील टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। यहां तक कि कुछ रिश्तेदारों ने उनके माता-पिता को अमानवीय सलाह तक दी। लेकिन इन तानों और मानसिक पीड़ा के बीच भी प्रो. मंगला कपूर ने हार नहीं मानी और अपने संघर्ष को ही अपनी शक्ति बना लिया। उनके अदम्य साहस और संघर्ष के लिए उन्हें राज्यसभा द्वारा रोल मॉडल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

प्रो. मंगला कपूर भारत की पहली एसिड अटैक सर्वाइवर मानी जाती हैं, जिनके जीवन पर आधारित एक मराठी फिल्म भी बनाई जा चुकी है। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रहीं और दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के साथ कार्य कर रही हैं। पद्मश्री सम्मान की घोषणा पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रो. मंगला कपूर का जीवन यह संदेश देता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, साहस, आत्मबल और संकल्प से हर अंधकार को पराजित किया जा सकता है।